दक्षिण कोरिया में नाबालिगों के खिलाफ बढ़े डिजिटल सेक्स क्राइम: रिपोर्ट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के बढ़ते प्रसार से किशोरों पर ऑनलाइन यौन शोषण का खतरा बढ़ा है, 7 साल में मामले 30 गुना बढ़े।
तस्वीर में नीले रंग की पृष्ठभूमि पर एक व्यक्ति की परछाई बैठी दिख रही है।
दक्षिण कोरिया में नाबालिगों के खिलाफ डिजिटल सेक्स अपराधों का खतरा बेहद तेजी से बढ़ा है। 19 वर्ष या उससे कम उम्र के जिन पीड़ितों ने डिजिटल यौन अपराधों को लेकर मदद मांगी, उनकी संख्या महज सात वर्षों में करीब 30 गुना बढ़ गई। यह आंकड़ा ऑनलाइन यौन शोषण के प्रति बच्चों और किशोरों की बढ़ती संवेदनशीलता को उजागर करता है।
राज्य संचालित नेशनल सेंटर फॉर डिजिटल सेक्सुअल क्राइम रिस्पॉन्स के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल 19 वर्ष या उससे कम उम्र के 3,052 पीड़ितों ने केंद्र से मदद मांगी। 2018 में यह संख्या 111 थी, जब संगठन ने इस संबंध में आंकड़े जुटाना शुरू किया था।
पहली बार इस आयु वर्ग में रिपोर्ट किए गए पीड़ितों की वार्षिक संख्या 3,000 के पार पहुंची है। यह ऐसे समय में सामने आया है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती तकनीकों की मदद से होने वाले डिजिटल सेक्स अपराध तेजी से कम उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। कुल पीड़ितों में नाबालिगों और 20 वर्ष की उम्र वाले लोगों की हिस्सेदारी 77 प्रतिशत से अधिक रही।
केंद्र के अनुसार, युवा लोग सोशल मीडिया और ऑनलाइन सेवाओं के सबसे सक्रिय उपयोगकर्ताओं में शामिल हैं। इससे डिजिटल सेक्स अपराधों के जोखिम के प्रति उनके संपर्क में आने की संभावना बढ़ सकती है।
इस बीच, केंद्र की ओर से दी जाने वाली कुल सहायता का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है। 2018 में सहायता के करीब 33,000 मामले थे, जो 2025 में बढ़कर 352,000 से अधिक हो गए। इनमें 90 प्रतिशत से अधिक सहायता अवैध सामग्री हटाने के अनुरोधों से जुड़ी थी। इस प्रक्रिया को इसलिए भी कठिन माना गया क्योंकि ऐसी सामग्री होस्ट करने वाले कई प्लेटफॉर्म विदेशों में स्थित हैं।
इस मुद्दे पर आयोजित हालिया फोरम में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि AI से तैयार यौन सामग्री, खासकर डीपफेक, के तेजी से प्रसार के मुकाबले कोरिया की प्रतिक्रिया पीछे रह रही है। यह फोरम 28 अगस्त 2026 को आयोजित किया गया था।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि किशोर आपराधिक संदिग्धों में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। ऐसे में कानून लागू करने की कार्रवाई के साथ-साथ अधिक प्रभावी रोकथाम शिक्षा की जरूरत पर जोर दिया गया। तेजी से बदलती डिजिटल तकनीक और बढ़ते ऑनलाइन जोखिम के बीच नाबालिग पीड़ितों की संख्या में यह उछाल डिजिटल सेक्स अपराधों से निपटने की चुनौती को और गंभीर बनाता है।