प्रतापनगर रेलवे स्टेशन का 71.58 करोड़ से कायाकल्प, आधुनिक यात्री सुविधाएं शुरू

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत वडोदरा के प्रतापनगर स्टेशन का पुनर्विकास किया गया है, जिससे मुख्य स्टेशन पर यातायात का दबाव कम होगा और क्षेत्रीय संपर्क सुधरेगा।

Update: 2026-06-02 14:29 GMT

वडोदरा रेल मंडल के अंतर्गत जून 2026 में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित किया गया ऐतिहासिक प्रतापनगर रेलवे स्टेशन, जहां यात्रियों के लिए नया प्लेटफॉर्म, लिफ्ट, सुसज्जित बुकिंग काउंटर और भित्ति चित्रों के साथ कलात्मक प्रवेश द्वार का निर्माण किया गया है।

भारतीय रेलवे के ऐतिहासिक और सामरिक गौरव को नया आयाम देते हुए वडोदरा मंडल के प्रतापनगर रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पूरी तरह कायाकल्प कर दिया गया है। वर्ष 1880 में नैरो गेज रेलवे के आगमन के प्रमुख केंद्र रहे और वर्ष 1922 में एक महत्वपूर्ण रेलवे वर्कशॉप की स्थापना के गवाह रहे इस ऐतिहासिक स्टेशन को अब एक रणनीतिक सैटेलाइट स्टेशन के रूप में विकसित किया जा चुका है। इस महत्वाकांक्षी पुनर्विकास का मुख्य उद्देश्य वडोदरा मुख्य स्टेशन पर यातायात के बढ़ते भारी दबाव को कम करना है। भविष्य में यहाँ से लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन और अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं की विस्तृत योजना तैयार की गई है, जिससे न केवल क्षेत्रीय संपर्क सुदृढ़ होगा बल्कि यात्रियों की यात्रा सुगम बनेगी। उल्लेखनीय है कि यह स्टेशन विश्व प्रसिद्ध 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' जाने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण बोर्डिंग स्टेशन की भूमिका निभाता है।

वडोदरा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) श्री राजू भडके ने इस पुनर्विकास पर आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि प्रतापनगर रेलवे स्टेशन का यह व्यापक पुनर्विकास न केवल यात्रियों को अद्वितीय और बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा, बल्कि वडोदरा शहर के संपूर्ण रेलवे अवसंरचनात्मक ढांचे को भी विकास की एक नई और अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा।

इस वृहद पुनर्विकास परियोजना को लगभग 71.58 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से धरातल पर उतारा गया है, जिसने स्टेशन को एक नया और अत्यंत भव्य स्वरूप प्रदान किया है। यात्री सुविधाओं के विस्तार के तहत स्टेशन के पुराने प्लेटफॉर्म नंबर 1, 2 और 3 पर बुनियादी एवं आधुनिक सुविधाओं को उन्नत किया गया है। इसके साथ ही, एक सर्वसुविधाजनक नए प्लेटफॉर्म नंबर 4 का निर्माण किया गया है, जिसके अंतर्गत उच्च स्तरीय प्लेटफॉर्मों का विस्तार और पुनर्सतहीकरण (रीसरफेसिंग) का कार्य संपन्न हुआ है। इन प्लेटफॉर्मों पर अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म शेल्टर स्थापित किए गए हैं ताकि यात्रियों के बैठने की अत्यंत सुगम व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। निर्मित किए गए नए स्टेशन भवन में विभिन्न अत्याधुनिक कार्यालयों की स्थापना की गई है। यात्रियों की अतिरिक्त सहूलियत के लिए नए और पर्याप्त शौचालयों का निर्माण किया गया है। साथ ही पूरे स्टेशन परिसर में आधुनिक साइनेज व्यवस्था और विशेष रूप से दिव्यांगजन-अनुकूल बुकिंग काउंटर सुविधाओं को विकसित किया गया है। यात्रियों की सुगम आवाजाही को गति देने के लिए स्टेशन पर दो नई लिफ्टों की स्थापना भी सुनिश्चित की गई है।

स्टेशन के बुनियादी ढांचे को नया विस्तार देते हुए इसके द्वितीय प्रवेश द्वार (सेकंड एंट्री) की तरफ एक शानदार नए स्टेशन भवन का निर्माण और एक बड़े वाणिज्यिक क्षेत्र (कमर्शियल एरिया) का विकास किया गया है, जिसने इस पूरे परिसर के स्वरूप को बेहद आकर्षक और आधुनिक बना दिया है। इस सेकंड एंट्री क्षेत्र में सुव्यवस्थित यातायात प्रबंधन, वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग सुविधा, निकास एवं प्रवेश के लिए पूरी तरह स्पष्ट मार्ग तथा बेहतरीन आधुनिक शहरी अवसंरचना को आकार दिया गया है।

यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से प्रतापनगर स्टेशन के कॉन्कोर्स क्षेत्र का भी पूरी तरह आधुनिकीकरण किया गया है। यहाँ अत्याधुनिक फ्लोरिंग के साथ-साथ आकर्षक वॉल क्लैडिंग की गई है, जिसमें भारतीय रेलवे के गौरवशाली और समृद्ध इतिहास की सुंदर झलक को जीवंत रूप से उकेरा गया है। इसके अतिरिक्त, स्टेशन पर उन्नत प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) के साथ-साथ पूरे परिसर में कलात्मक भित्ति चित्र अर्थात म्यूरल्स स्थापित किए गए हैं, जो स्टेशन को एक बेहद मनमोहक और नया स्वरूप प्रदान करते हैं।

रेलवे ने इस पूरी परियोजना में समावेशी विकास का ध्यान रखते हुए दिव्यांगजन यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म को पूरी तरह सुगम, सुरक्षित एवं सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करने वाली सभी आवश्यक सुलभ सुविधाओं से लैस किया है। यहाँ विशेष दिव्यांगजन-अनुकूल बुकिंग काउंटर सुविधाओं का विकास करने के साथ ही नवनिर्मित फुट ओवर ब्रिज को आधुनिक लिफ्टों से सीधे जोड़ा गया है, जिससे दिव्यांग यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने में अत्यधिक सुगमता हासिल हो सके और यह स्टेशन पूर्णतः दिव्यांगजन-अनुकूल स्टेशन की श्रेणी में स्थापित हो सके।

स्टेशन के दोनों ओर बसे शहर के हिस्सों तथा सभी प्लेटफॉर्मों को आपस में सुरक्षित जोड़ने के लिए एक विशाल 12 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) निर्मित किया गया है जो आवागमन को बेहद सुगम बनाता है। यात्रियों की निर्बाध और बिना किसी बाधा के आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए इस विशाल फुट ओवर ब्रिज के दोनों सिरों पर बेहतरीन रैंप की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, और साथ ही इस फुट ओवर ब्रिज को आधुनिक लिफ्टों से भी जोड़ा गया है ताकि बुजुर्गों, मरीजों और दिव्यांगों को प्लेटफॉर्मों तक पहुँचने में कोई कठिनाई न हो।

करोड़ों की लागत से पूर्ण हुई यह वृहद पुनर्विकास परियोजना वास्तव में भारतीय रेल के “यात्री सुविधा, सुगम यात्रा और आधुनिक स्टेशन” के राष्ट्रीय संकल्प और प्रतिबद्धता को धरातल पर साकार करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है, जो आने वाले समय में क्षेत्रीय परिवहन की तस्वीर बदल देगा।

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