सड़क पर दंडवत यात्रा करते हुए कांवड़ यात्री गौरव शर्मा गोमुख से गाजियाबाद की यात्रा के दौरान।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले कारोबारी गौरव शर्मा ने अपनी अटूट आस्था और भक्ति की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे जानकर हर कोई हैरान है। भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा इतनी गहरी थी कि उन्होंने गोमुख से गाजियाबाद तक की करीब 500 किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल या सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि दंडवत यात्रा करते हुए पूरी की। इस कठिन अनुष्ठान को पूरा करने में उन्हें पूरे 101 दिन का समय लगा।

सावन के पवित्र महीने और शिवरात्रि के दौरान देश भर में कांवड़ यात्रा की धूम रहती है। इस दौरान कोई पैदल तो कोई वाहन या व्हीलचेयर के जरिए अपनी यात्रा पूरी करता है। लेकिन गाजियाबाद के पटेल नगर-2 में रहने वाले गौरव शर्मा ने इन सबसे हटकर एक बेहद कठिन मार्ग चुना। उन्होंने गोमुख से अपनी दंडवत कांवड़ यात्रा की शुरुआत की और गाजियाबाद के प्रसिद्ध दूधेश्वरनाथ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अपने आराध्य के चरणों में गंगाजल अर्पित करना था।

यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। सूरज की चिलचिलाती धूप, तपती हुई सड़कें, पथरीले रास्ते, पहाड़ों की कठिन चढ़ाई और लगातार होने वाली बारिश ने उनके इस सफर को और भी ज्यादा चुनौतीूपर्ण बना दिया था। इसके अलावा, लगातार जमीन पर माथा टेकने और आगे बढ़ने की वजह से उनके शरीर पर कई घाव हो गए थे, पैरों में छाले पड़ गए थे और एक घुटना बुरी तरह जख्मी हो गया था। हर बार जमीन पर झुकने पर उन्हें शारीरिक रूप से काफी पीड़ा होती थी, लेकिन उनके मन में भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास था कि बाबा उनकी नैया पार लगा देंगे। इसी हौसले और दृढ़ संकल्प के कारण दर्द भी उनकी भक्ति के आगे बौना साबित हुआ।

यात्रा के दौरान वे अपने साथ एक छोटी पालकी वाली कांवड़ लेकर चल रहे थे, जिसमें उन्होंने पूरी सावधानी के साथ गंगाजल संभाला हुआ था। वे लगातार 101 दिनों तक बिना थके और बिना रुके, हर कुछ कदम पर जमीन को माथा टेकते, उठते और फिर आगे बढ़ते रहे। उनके इस समर्पण और त्याग ने साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा के आगे बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी हार मान लेती हैं।

उनकी इस कठिन साधना और भक्ति को देखते हुए रास्ते में कांवड़िया संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा उनका जोरदार स्वागत किया गया। उन्हें 50 से अधिक अलग-अलग स्थानों पर सम्मानित भी किया गया। हालांकि, गौरव शर्मा ने बेहद विनम्रता दिखाते हुए वह सम्मान हरिद्वार से दंडवत करते हुए भगवान शिव का जलाभिषेक करने जाने वाले अन्य कांवड़ियों को समर्पित कर दिया। अंत में जब वे दूधेश्वरनाथ मंदिर पहुंचे और भगवान शिव के चरणों में गंगाजल अर्पित किया, तो उनके शरीर पर भले ही थकान और जख्म थे, लेकिन उनके चेहरे पर एक अलग ही संतोष और दिव्यता साफ झलक रही थी। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा आज हर किसी के लिए आस्था, साहस और समर्पण का एक बड़ा उदाहरण बन चुकी है।