छठ पूजा से पहले दिल्ली के कालिंदी कुंज के पास यमुना नदी की सतह पर जमा हुआ सफेद जहरीला झाग|

छठ महापर्व अब बेहद करीब आ चुका है, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली की यमुना नदी की स्थिति में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। यमुना नदी में कालिंदी कुंज और आईटीओ के आसपास दूर-दूर तक सफेद झाग तैर रहा है, जो पिछले एक हफ्ते से लगातार एक बड़ी समस्या बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार पानी में फॉस्फेट और अमोनिया का स्तर बढ़ने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है, जहां यमुना घाटों पर डिटर्जेंट और औद्योगिक कचरे के कारण पानी के ऊपर सफेद झाग जमा हो जाता है।

कालिंदी कुंज और ओखला बैराज के पास पानी के ऊपर तैरते इस झाग की वजह से ताजे पानी का बहाव न के बराबर हो जाता है और नालों से आने वाले गंदे पानी का फ्लो बढ़ जाता है, जिससे यह झाग और अधिक फैलने लगता है। इस समस्या से निपटने और झाग को खत्म करने के लिए अब दिल्ली जल बोर्ड ने तीन चरणों में एंटी-फोमिंग केमिकल्स का छिड़काव करने का एक खास प्लान बनाया है। इसके साथ ही बोट्स यानी नावों के जरिए भी पानी से इस झाग को हटाने की लगातार कोशिश की जा रही है।

यमुना की इस खराब हालत के कारण छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं और व्रतियों के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि छठ व्रतियों को या तो किसी दूसरे घाट पर जाना पड़ेगा या फिर वे अपने घरों पर ही इस महापर्व को करना पसंद करेंगी। इसके अलावा, दिल्ली में चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा यमुना की सफाई को लेकर किए गए वादों के बाद भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से सियासी जंग शुरू हो सकती है और आम आदमी पार्टी हमलावर हो सकती है।

आगामी छठ महापर्व की तिथियों के अनुसार पहला दिन यानी नहाय-खाय शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को है। इसके बाद दूसरा दिन यानी खरना शनिवार, 14 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। महापर्व के तीसरे दिन यानी रविवार, 15 नवंबर 2026 को डूबते हुए सूर्य को शाम का अर्घ्य दिया जाएगा। अंत में, चौथे और अंतिम दिन सोमवार, 16 नवंबर 2026 को उगते हुए सूर्य को सुबह का अर्घ्य अर्पित किया जाएगा और इसी के साथ व्रत का पारण संपन्न होगा।