कसाब को सजा दिलाने की अनकही कहानी: राजकुमार राव की दमदार एक्टिंग से सजी 'प्रहार' लोगों के दिलों पर छोड़ रही गहरी छाप
अविनाश अरुण के निर्देशन में बनी फिल्म 'प्रहार' मशहूर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की 26/11 केस में लड़ी गई कानूनी लड़ाई को दिखाती है।
अविनाश अरुण निर्देशित फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' में अभिनेता राजकुमार राव ने मुख्य भूमिका निभाई है।
राजकुमार राव, वामिका गब्बी, सिकंदर खेर और जयदीप अहलावत स्टारर फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्जवल निकम' शुक्रवार, 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। 26/11 के भयावह आतंकी हमले पर अब तक कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं, लेकिन यह फिल्म मशहूर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के नजरिए से उस कानूनी लड़ाई की अनकही परतें खोलती है। जब अजमल कसाब के खिलाफ सबूतों की भरमार थी, तो उसे दोषी ठहराने में चार साल क्यों लगे, फिल्म इसी सवाल का जवाब तलाशती है।
फिल्म की कहानी देश के जाने-माने सरकारी वकील उज्ज्वल निकम (राजकुमार राव) से शुरू होती है, जिनकी जिंदगी न्याय दिलाने की जिद के इर्द-गिर्द सिमटी है। निकम उस वक्त अपनी बेटी की शादी की जिम्मेदारियां निभा रहे होते हैं, जब मुंबई पर 26/11 का भयावह आतंकी हमला होता है। हमले के दौरान पकड़े गए एकमात्र जीवित आतंकवादी अजमल कसाब (ललित प्रभाकर) के खिलाफ मुकदमा लड़ने की चुनौती अब निकम के सामने है, जबकि दूसरी ओर बचाव पक्ष के वकील अब्बास काजमी (सिकंदर खेर) से उनकी कड़ी टक्कर होती है। इसके बाद कहानी कसाब को सजा दिलाने की कानूनी लड़ाई और निकम की पारिवारिक जंग—इन दो समानांतर मोर्चों पर आगे बढ़ती है।
निर्देशक अविनाश अरुण का संयमित निर्देशन और थ्रिलर अंदाज दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं। 'प्रहार' महज 26/11 के जख्मों को कुरेदने वाली फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और न्यायिक व्यवस्था में विश्वास जगाने वाली एक विचारोत्तेजक कहानी है। दस साल की बच्ची की गवाही, कसाब का इकबालिया बयान और निकम की क्लोजिंग स्पीच जैसे दृश्य दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ते हैं। फिल्म के संवाद चुटीले और प्रभावशाली हैं तथा यह याद दिलाती है कि न्याय की असली ताकत बदले में नहीं, बल्कि निष्पक्ष सुनवाई में है।
अभिनय की बात करें तो राजकुमार राव एक बार फिर उज्ज्वल निकम की भूमिका में नगीने की तरह चमकते हैं। वे निकम के हाव-भाव, चाल-ढाल और व्यक्तित्व की गरिमा को बखूबी उभारते हैं। वामिका गब्बी ने समर्पित पत्नी के किरदार में सहज अभिनय किया है, वहीं सिकंदर खेर बचाव पक्ष के वकील के रूप में और जयदीप अहलावत संक्षिप्त भूमिका में अपनी गहरी छाप छोड़ते हैं। कसाब के किरदार में ललित प्रभाकर फिल्म का सरप्राइज पैकेज हैं, जिनका सधा हुआ और बेचैन कर देने वाला अभिनय दर्शकों को असहज करने में सफल रहता है। यदि आप सच्ची घटनाओं और कोर्टरूम ड्रामा के शौकीन हैं, तो यह फिल्म जरूर देखी जा सकती है।