इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5: माधुरी दीक्षित ने याद कीं अपनी गुरु सरोज खान, मंच पर हुईं भावुक
'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' के मंच पर बॉलीवुड की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित अपनी गुरु सरोज खान को याद कर भावुक हो गईं। क्या थी उनकी उस सख्त और नरम गुरु के साथ अनकही कहानी? जानने के लिए देखें इस सप्ताह का विशेष एपिसोड।
इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5 के सेट पर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित अपनी दिवंगत गुरु और मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान के साथ बिताए पलों को याद कर भावुक हो गईं।
भारतीय सिनेमा की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित के नृत्य कौशल को विश्व पटल पर स्थापित करने में जिस शख्सियत का सबसे बड़ा योगदान रहा, वह हैं लीजेंडरी कोरियोग्राफर सरोज खान। हाल ही में सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के लोकप्रिय डांस रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' के आगामी एपिसोड में माधुरी दीक्षित ने अपनी गुरु सरोज खान को याद करते हुए एक अत्यंत भावुक क्षण साझा किया। शो का आगामी एपिसोड 'इंडिया वाला डांस' थीम पर आधारित है, जिसमें माधुरी दीक्षित अपनी आगामी नेटफ्लिक्स फिल्म 'मां-बहन' के प्रचार के सिलसिले में पहुंची थीं।
नृत्य के प्रति अपने आजीवन समर्पण को रेखांकित करते हुए माधुरी ने कहा कि नृत्य उनके जीवन का अभिन्न अंग रहा है और यह शो भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक सुंदर जश्न है। इस दौरान, जब बात उनकी और सरोज खान की जुगलबंदी की छिड़ी, तो अभिनेत्री की आंखें नम हो गईं। अपनी गुरु के साथ बिताए पलों को याद करते हुए माधुरी ने साझा किया कि सरोज जी बॉलीवुड नृत्य में उनकी गुरु रही हैं और आज भी वह उन्हें बहुत याद करती हैं। उन्होंने बताया कि वे बहुत सख्त थीं, लेकिन साथ ही उनका स्वभाव बहुत नरम भी था, जिसके कारण उनके बीच एक अद्वितीय और गहरा रिश्ता कायम था।
माधुरी दीक्षित और सरोज खान की जोड़ी ने दशकों तक भारतीय दर्शकों को यादगार नृत्य प्रस्तुतियां दी हैं, जो आज भी मील का पत्थर मानी जाती हैं। उनका यह संबंध केवल पेशेवर नहीं, बल्कि अनुशासन, विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित था। यह शो दर्शकों को एक बार फिर उस सुनहरे दौर की याद दिलाएगा, जब इन दोनों की जुगलबंदी ने सिनेमा के पर्दे पर जादू बिखेरा था। 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' का प्रसारण प्रत्येक शनिवार और रविवार रात 9:30 बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर होता है, जिसे सोनी लिव ऐप पर भी देखा जा सकता है। यह विशेष एपिसोड मनोरंजन के साथ-साथ एक महान गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक बनेगा।