कौन है Kumar Sanu? 90s की वो आवाज़ जो आज भी दिलों पर राज करती है

केदारनाथ भट्टाचार्य से पद्म श्री विजेता बनने तक का सफर और 'आशिकी' फिल्म से मिली रातों-रात सफलता का उनके करियर पर प्रभाव।

Update: 2026-05-01 10:22 GMT

पद्म श्री से सम्मानित गायक कुमार सानू एक लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान मंच पर प्रस्तुति देते हुए।

आज भी जब किसी प्लेलिस्ट में 90s के गाने बजते हैं, तो एक नाम अपने आप ट्रेंड करने लगता है—Kumar Sanu। सोशल मीडिया पर रील्स से लेकर लाइव कॉन्सर्ट्स तक, उनकी आवाज़ का जादू फिर से वायरल हो रहा है। वजह साफ है—वो दौर जब हर लव स्टोरी, हर ब्रेकअप और हर इमोशन को उनकी मेलोडियस आवाज़ ने एक अलग पहचान दी थी। आज की जनरेशन भी उनके गानों को रीमिक्स नहीं, ओरिजिनल फील के लिए सुन रही है, और यही उन्हें फिर से चर्चा के केंद्र में ला रहा है।

कोलकाता में जन्मे केदारनाथ भट्टाचार्य से कुमार सानू बनने तक का सफर आसान नहीं था। उनके पिता खुद एक संगीतकार थे, जिससे उन्हें संगीत की नींव मिली, लेकिन इंडस्ट्री में पहचान बनाने के लिए उन्हें लंबा स्ट्रगल करना पड़ा। 80s के आखिर में Jagjit Singh ने उन्हें मौका दिलवाया और यहीं से उनकी किस्मत बदलनी शुरू हुई। लेकिन असली गेम-चेंजर बना 1990 में आया Aashiqui, जिसके गानों ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया।

90s का दौर सच में कुमार सानू का गोल्डन एरा था। Saajan, Deewana, Baazigar और 1942: A Love Story जैसी फिल्मों में उनकी आवाज़ ने ऐसा जादू चलाया कि उन्होंने लगातार 5 साल Filmfare Awards जीतकर रिकॉर्ड बना दिया। उनकी सिंगिंग की खासियत थी—सिंपल लेकिन दिल को छू लेने वाला इमोशन, जो सीधे सुनने वाले के दिल में उतर जाता था। यही वजह थी कि वो उस दौर में हर म्यूजिक डायरेक्टर की पहली पसंद बन गए।

उनकी पॉपुलैरिटी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1993 में उन्होंने एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड करके Guinness World Records में अपना नाम दर्ज करा लिया। Alka Yagnik के साथ उनके डुएट्स ने तो मानो रोमांस की नई परिभाषा ही लिख दी थी। उस दौर में Udit Narayan के साथ उनकी राइवलरी भी खूब चर्चा में रही, लेकिन दोनों की आवाज़ों ने मिलकर 90s का म्यूजिक गोल्डन बना दिया।

2000s के बाद भले ही बॉलीवुड में उनका दबदबा थोड़ा कम हुआ, लेकिन उनका क्रेज कभी खत्म नहीं हुआ। लाइव कॉन्सर्ट्स, रियलिटी शोज़ में जज और मेंटर के रूप में उनकी मौजूदगी ने उन्हें नई जनरेशन से जोड़े रखा। 2009 में भारत सरकार ने उन्हें Padma Shri से सम्मानित किया, जो उनके योगदान की बड़ी पहचान है। आज भी वो स्टेज पर आते हैं तो पूरा माहौल 90s की यादों में डूब जाता है।

असल में कुमार सानू सिर्फ एक सिंगर नहीं, एक इमोशन हैं—वो आवाज़ जो प्यार, दर्द और यादों को एक साथ जोड़ देती है। शायद यही वजह है कि इतने सालों बाद भी लोग उन्हें सिर्फ सुनते नहीं, महसूस करते हैं। और यही कारण है कि आज भी हर कोई पूछ रहा है—कौन है कुमार सानू? जवाब है—वो आवाज़, जो कभी पुरानी नहीं होती।

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