कौन हैं जगती श्रीकुमार? 1500 फिल्मों का वो कॉमेडी किंग जिसने मलयालम सिनेमा बदल दिया

1500 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाले जगती श्रीकुमार ने सड़क हादसे के बाद 2022 में फिल्म 'सीबीआई 5' से बड़े पर्दे पर वापसी की।

Update: 2026-05-11 14:24 GMT

तिरुवनंतपुरम स्थित अपने आवास पर दिग्गज मलयालम अभिनेता जगती श्रीकुमार, जिन्होंने चार दशक लंबे करियर में पांच केरल राज्य फिल्म पुरस्कार जीते हैं।

आज भी सोशल मीडिया पर जब मलयालम सिनेमा की सबसे आइकॉनिक कॉमिक टाइमिंग की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है जगती श्रीकुमार का। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में 1500 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके जगती सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं, बल्कि पूरे मलयालम सिनेमा की पहचान बन चुके हैं। उनकी एक्टिंग का अंदाज़ ऐसा था कि दर्शक एक ही फिल्म में हंसते-हंसते इमोशनल भी हो जाते थे। साल 2022 में जब उन्होंने “सीबीआई 5: द ब्रेन” से वापसी की, तो फैंस की आंखें नम हो गईं क्योंकि एक बड़े सड़क हादसे के बाद लोग उन्हें फिर स्क्रीन पर देखने की उम्मीद लगभग छोड़ चुके थे।

5 जनवरी 1951 को तिरुवनंतपुरम में जन्मे श्रीकुमार आचार्य, आगे चलकर “जगती श्रीकुमार” के नाम से मशहूर हुए। यह नाम उनके इलाके ‘जगती’ से आया था। उनके पिता एन. के. आचार्य मशहूर नाटककार और लेखक थे, इसलिए अभिनय का माहौल उन्हें बचपन से मिला। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने पहली बार स्टेज पर एक्टिंग की और फिर कॉलेज के दौरान थिएटर में लगातार सक्रिय रहे। बॉटनी में डिग्री लेने के बाद उन्होंने कुछ समय मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी भी की, लेकिन किस्मत उन्हें कैमरे के सामने ले आई। 1974 में “कन्याकुमारी” से उनका फिल्मी डेब्यू हुआ, लेकिन असली पहचान “चट्टांबी कल्याणी” से मिली और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

1980 और 90 का दौर जगती श्रीकुमार के नाम रहा। मोहनलाल और प्रियदर्शन के साथ उनकी जोड़ी ने मलयालम सिनेमा को कई ब्लॉकबस्टर दीं। “बोइंग बोइंग”, “थलावट्टम”, “मुकुंथेत्ता सुमित्रा विलिक्कुन्नु”, “किलुक्कम”, “योधा”, “काबुलीवाला”, “मीनाराम”, “सीआईडी उन्नीकृष्णन”, “फ्रेंड्स” और “उदयनानु थारम” जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी मीम्स और रील्स में जिंदा हैं। “योधा” का अरासुमूट्टिल अप्पुकुट्टन हो या “मीसा माधवन” का पिल्लेचन, उनकी बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी ने उन्हें एक अलग ही लीग में पहुंचा दिया। खास बात यह रही कि वह सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं रहे। “वास्तवम”, “परदेसी”, “रमनाम” और “उरुमी” जैसी फिल्मों में उन्होंने गंभीर और नेगेटिव किरदार निभाकर आलोचकों को भी हैरान कर दिया।

जगती श्रीकुमार की लोकप्रियता का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पांच केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड जीते और मलयालम इंडस्ट्री में उन्हें “लिविंग लीजेंड” का दर्जा मिला। “किलुक्कम” और “अपूर्वम चिलर” के लिए मिला स्टेट अवॉर्ड उनके करियर का बड़ा मोमेंट था, जबकि “मीसा माधवन” और “निझालकुथु” ने उन्हें फिर से नंबर वन बना दिया। फिल्मों के अलावा उन्होंने निर्देशन, कहानी लेखन और प्लेबैक सिंगिंग में भी हाथ आजमाया। उनके भाषण और स्टेज प्रेजेंस भी उतने ही लोकप्रिय रहे जितनी उनकी फिल्में। ऑनस्क्रीन मजाकिया दिखने वाले जगती असल जिंदगी में बेहद बेबाक और तेज-तर्रार वक्ता माने जाते हैं।

फिर साल 2012 में एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे साउथ सिनेमा को हिला दिया। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद जगती लंबे समय तक अस्पताल में रहे। उनकी बोलने की क्षमता तक प्रभावित हो गई और उनका फिल्मी करियर लगभग रुक गया। लेकिन फैंस का प्यार कम नहीं हुआ। लोग उनकी पुरानी फिल्मों के क्लिप्स शेयर करते रहे और उनकी वापसी की दुआ करते रहे। आखिरकार 2022 में “सीबीआई 5: द ब्रेन” में बिना डायलॉग के सिर्फ उनकी मौजूदगी ने थिएटर में तालियां बजवा दीं। यही स्टारडम होता है, जहां कलाकार का चेहरा ही इमोशन बन जाता है।

आज जगती श्रीकुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि मलयालम सिनेमा की विरासत माने जाते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग, एक्सप्रेशन और हर किरदार में जान डाल देने की कला ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे महान कलाकारों में शामिल कर दिया है। नई पीढ़ी उन्हें मीम्स और वायरल क्लिप्स से जानती है, लेकिन सिनेमा प्रेमियों के लिए वह हमेशा उस दौर की याद रहेंगे जब एक अकेला कलाकार पूरी फिल्म को अपने कंधों पर हिट करा देता था।

Similar News