नीट यूजी पेपर लीक: जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक विवाद के विरोध में छात्र संगठनों ने शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शन बुलाया है, जहां केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
देश भर के 22 लाख से अधिक पंजीकृत मेडिकल परीक्षार्थियों के लिए आयोजित नीट-यूजी परीक्षा 2026 के कथित पेपर लीक और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा टेस्ट रद्द किए जाने के संदर्भ में जारी एक ग्राफिक बैनर।
NEET UG 2026 paper leak : देश के लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़े NEET-UG परीक्षा पेपर लीक मामले ने अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप अख्तियार कर लिया है। पिछले कुछ समय से परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विफलताओं से आक्रोशित युवा अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। आगामी शनिवार को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक विशाल युवा विरोध प्रदर्शन का आयोजन होने जा रहा है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य हाल ही में सामने आए NEET-UG परीक्षा घोटाले के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना है। परीक्षा रद्द होने के बाद उपजे मानसिक तनाव के कारण देश के कई हिस्सों से आ रही छात्रों की आत्महत्या की दर्दनाक खबरें इस आंदोलन की गंभीरता और युवाओं के गहरे आक्रोश को बयां कर रही हैं।
इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते 3 मई को हुई, जब देशभर के 22 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी साल भर की कड़ी मेहनत के बाद NEET-UG की परीक्षा दी थी। परीक्षा संपन्न होने के कुछ ही समय बाद एक 'गेस पेपर' लीक होने की बात सामने आई, जिसके तार राजस्थान के कोचिंग सेंटर्स और महाराष्ट्र के प्रिंटिंग प्रेसों से जुड़े पाए गए। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि लीक हुआ पेपर मुख्य परीक्षा के प्रश्नों से हूबहू मेल खा रहा था। इस गंभीर गड़बड़ी और कथित मल्टी-बिलियन रुपये के रैकेट के खुलासे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 12 मई को इस परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर दिया। सरकार और जांच एजेंसियों के लिए यह मामला बेहद पेचीदा साबित हो रहा है, जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कार्रवाई करते हुए कई अंदरूनी सूत्रों और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। परीक्षा रद्द होने के सदमे और अत्यधिक मानसिक दबाव के कारण अब तक कम से कम छह छात्र मौत को गले लगा चुके हैं, जिनमें मध्य प्रदेश की आकांक्षा नाम की छात्रा भी शामिल है।
पेपर लीक अरबों खरबों का धंधा है। इस धंधे में बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं।
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 5, 2026
जब तक आप सब लोग सड़कों पे उतर के सरकार को मजबूर नहीं करोगे, ये धंधा बंद नहीं होगा। अगले साल ऐसे ही सारे पेपरों में फिर से गड़बड़ होगी।
अपने बच्चों के भविष्य के लिए, अपने परिवार के भविष्य के लिए, देश के… pic.twitter.com/bYbITKvkUx
इस गंभीर संकट के बीच हाल ही में 16 मई को 30 वर्षीय अभिजीत दिपके द्वारा गठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' इस शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले बड़े प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही है। इस संगठन की शुरुआत मूल रूप से धोखेबाजों के खिलाफ एक अदालती टिप्पणी पर व्यंग्य के रूप में हुई थी, लेकिन अब यह युवाओं की बेरोजगारी और परीक्षा घोटालों के खिलाफ एक बड़ा मंच बनकर उभरा है। इस विरोध प्रदर्शन को सोनम वांगचुक और अभिनेता प्रकाश राज जैसी प्रमुख हस्तियों का समर्थन भी मिला है। दूसरी तरफ, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित प्रमुख विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए सड़क पर उतरने का आह्वान किया है और सरकार से पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी पेपर लीक मामलों पर एक 'व्हाइट पेपर' यानी श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
On my way to India…
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) June 5, 2026
Leaving my fate in the hands of the Constitution. #JaiBhim
हालांकि, इस ज्वलंत मुद्दे पर देश के युवा वर्ग में एक स्पष्ट वैचारिक विभाजन भी देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल सुधार के लिए इस प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ युवा हिंदुओं का एक बड़ा धड़ा इस आंदोलन के राजनीतिक नेतृत्व का कड़ा विरोध कर रहा है। 'द जयपुर डायलॉग्स' जैसे सोशल मीडिया हैंडल द्वारा साझा किए जा रहे संदेशों में युवा खुद को 'गर्वित भारतीय हिंदू' और जेन-जी बताते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के इस आंदोलन से खुद को पूरी तरह से अलग कर रहे हैं। इस बीच, कानूनी और सुरक्षात्मक मोर्चे पर सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी है। वहीं, कानूनी बाध्यताओं और छात्रों के करियर को ध्यान में रखते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने आगामी 21 जून को बेहद कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की है। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने न केवल देश की साख को ठेस पहुंचाई है, बल्कि यह युवा पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक अत्यंत चिंताजनक विषय बन चुका है。