वरिष्ठ वकील खाजा मुईजुद्दीन की SUV रैमिंग में हत्या ; CCTV फुटेज में सामने आया प्री-प्लान्ड एंगल
हैदराबाद के मासब टैंक/शांति नगर क्षेत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता खाजा मुईजुद्दीन की एक एसयूवी द्वारा कथित सुनियोजित रैमिंग में मौत हो गई। वक्फ संपत्ति विवादों से जुड़े इस मामले में CCTV फुटेज के आधार पर हत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने जांच तेज कर कई लोगों को हिरासत में लिया है।
हैदराबाद में वरिष्ठ अधिवक्ता खाजा मुईजुद्दीन की कार से कुचलकर हत्या
हैदराबाद में शनिवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे न्यायिक और सामाजिक हलकों को झकझोर कर रख दिया, जब वरिष्ठ अधिवक्ता खाजा मुईजुद्दीन (63) की उनके ही घर के बाहर एक तेज रफ्तार एसयूवी द्वारा कथित रूप से कुचलकर हत्या कर दी गई। यह घटना मासब टैंक/शांति नगर क्षेत्र में उस समय हुई जब वे अपने घर से बाहर निकलकर अपनी कार में बैठने की तैयारी कर रहे थे।
जानकारी के अनुसार, एक हरे रंग की महिंद्रा स्कॉर्पियो एसयूवी ने अचानक तेजी से आकर उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल अधिवक्ता को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जांच में इसे सड़क दुर्घटना यानी हिट-एंड-रन माना गया था, लेकिन बाद में सामने आए CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और वाहन की गतिविधियों के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने इसे सुनियोजित हत्या का मामला मानते हुए जांच का रुख बदल दिया।
मृतक खाजा मुईजुद्दीन एक वरिष्ठ अधिवक्ता थे, जो लंबे समय से हैदराबाद हाईकोर्ट और सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे थे। वे विशेष रूप से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से जुड़े संवेदनशील संपत्ति विवादों की पैरवी के लिए जाने जाते थे, जिनमें कथित भूमि अतिक्रमण और विवादित संपत्तियों के मामले शामिल थे।
परिजनों के अनुसार, यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। मृतक के पुत्र मोहम्मद फरहान ने आरोप लगाया कि नवाब महबूब आलम खान और उनके पुत्र मुजाहिद आलम खान ने वर्षों से चल रहे अदालती विवादों के चलते इस हमले की साजिश रची। परिवार ने यह भी दावा किया कि यह अधिवक्ता पर किया गया छठा हमला था, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर हो जाता है। पुलिस जांच में वाहन चालक के रूप में विनय नामक व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने और अलाम परिवार से जुड़े लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की भी जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह हमला लंबे समय से तैयार की गई एक संगठित साजिश का हिस्सा था।
पुलिस के अनुसार, CCTV फुटेज में यह संकेत मिले हैं कि वाहन ने जानबूझकर अधिवक्ता को टक्कर मारी, जिससे यह मामला केवल दुर्घटना नहीं रह गया। जांच में यह भी संदेह जताया जा रहा है कि आरोपियों ने घटना से पहले रेकी की थी और पूरी योजना के तहत वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना के बाद शहर में कानून-व्यवस्था और वक्फ संपत्ति विवादों से जुड़े वकीलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
AIMIM नेताओं और परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए यह भी कहा है कि भूमि विवादों से जुड़े मामलों में कार्यरत अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह मामला अब केवल एक सड़क हादसे की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसे संगठित अपराध की ओर संकेत करता है, जिसने न्यायिक व्यवस्था और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों की सुरक्षा पर गहरी चिंता पैदा कर दी है।