भारतीय रिजर्व बैंक के लोगों के सामने खड़े आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा एमपीसी बैठक के संदर्भ में दिखाई दे रहे हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक के फैसले आज सबके सामने आने वाले हैं। छह सदस्यों वाली इस समिति की बैठक 3 अगस्त से शुरू हुई थी, और इसमें लिए गए निर्णयों की आधिकारिक घोषणा आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा की जाएगी। इस बैठक पर देश भर के आम नागरिकों से लेकर बड़े-बड़े बाजारों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका सीधा असर लोगों की जेब और मासिक बजट पर पड़ने वाला है।

यदि आपका किसी भी प्रकार का कर्ज चल रहा है, तो यह समय आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फिलहाल देश में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर बना हुआ है। आपको बता दें कि रेपो रेट वह दर होती है जिस पर केंद्रीय बैंक यानी आरबीआई देश के कमर्शियल बैंकों को कर्ज उपलब्ध कराता है। जब भी रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, तो बैंकों के लिए आरबीआई से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ता है। बैंक इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आम जनता पर डालते हैं और होम लोन, कार लोन तथा पर्सनल लोन समेत सभी तरह के कर्जों पर ब्याज दरों को बढ़ा देते हैं, जिससे मासिक किस्त यानी ईएमआई (EMI) महंगी हो जाती है।

हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों और देश के जाने-माने अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार आरबीआई रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव करने से बच सकता है। देश के 10 प्रमुख अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, घरेलू मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल के स्थिर होने और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक इस बार सावधानी भरा रुख अपना सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भू-राजनीतिक तनाव, ईरान युद्ध जैसे हालातों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और असमान मानसून के कारण बढ़ रहे महंगाई के जोखिमों के बीच आरबीआई 'देखो और प्रतीक्षा करो' की नीति पर काम करेगा।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि फिलहाल महंगाई नरम स्थिति में बनी हुई है, ऐसे में नीतिगत दरों में यथास्थिति बनाए रखना ही सबसे बेहतर विकल्प साबित होगा। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए पिछले एक साल के दौरान रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है, लेकिन चालू वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान आगे चलकर नीतिगत दरों में बदलाव या बढ़ोतरी की संभावनाएं बनी रह सकती हैं। कुछ ही देर में गवर्नर संजय मल्होत्रा की घोषणा के बाद यह साफ हो जाएगा कि आने वाले दिनों में लोन की ईएमआई पर राहत मिलेगी या फिर लोगों को अपनी जेब और ढीली करनी होगी।