मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग, कल्याण आश्रम ने पास किया प्रस्ताव
भीलवाड़ा में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने 1913 के बलिदान को याद दिलाते हुए पाठ्य-पुस्तकों में मानगढ़ के इतिहास को शामिल करने का आग्रह किया।
भीलवाड़ा के रामेश्वरम भवन में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी मंच पर उपस्थित हैं।
भीलवाड़ा, 2 अक्टूबर 2026। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने मानगढ़ धाम को अविलम्ब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की है। भीलवाड़ा के रामेश्वरम भवन में चल रही वनवासी कल्याण आश्रम के केन्द्रीय कार्यकारी मण्डल की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया। पत्रकार वार्ता में कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने प्रस्ताव की जानकारी दी।
सत्येंद्र सिंह ने बताया कि 17 नवम्बर 1913 को वागड़ क्षेत्र के संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चल रहे भगत आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजी शासन ने मानगढ़ धाम में भीषण गोलीकांड किया था। इसमें 1500 से अधिक जनजातीय महिला, पुरुष और बच्चे मारे गए। यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से छह वर्ष पूर्व हुई थी और स्वाधीनता संग्राम में जनजातीय समाज के अद्वितीय बलिदान का महत्वपूर्ण अध्याय है।
कल्याण आश्रम के अनुसार गोविंद गुरु के नेतृत्व में भगत आंदोलन ने अंग्रेजी शासन के दमनकारी कानूनों के विरुद्ध जनजागरण के साथ जनजातीय समाज की संस्कृति, आस्था और जीवन-मूल्यों को भी जागृत किया। मानगढ़ की घटना ने राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष की चेतना को और व्यापक किया।
प्रस्ताव में उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी ने 1 नवम्बर 2022 को मानगढ़ धाम पहुंचकर बलिदानी जनजातीय समाज को श्रद्धांजलि दी थी। मा. राष्ट्रपतिजी ने भी 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर बलिदानियों को नमन किया था। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मान्यता देने की सिफ़ारिश कर चुका है।
कल्याण आश्रम ने केंद्र सरकार से मांग की कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के साथ उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सरकारों से स्कूल-कॉलेजों की पाठ्य-पुस्तकों में मानगढ़ के इतिहास को उचित स्थान देने का आग्रह किया गया।
केन्द्रीय कार्यकारी मण्डल ने सामाजिक-धार्मिक नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों से भी इस विषय पर सभी मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास करने की अपील की।
इस पत्रकार वार्ता में कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तेची गुबिन, कल्याण आश्रम के संयुक्त महामंत्री विष्णुकांत, राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के अध्यक्ष डॉ. थावरचंद डामोर, प्रचार प्रमुख प्रमोद पेठकर और बैठक के मीडिया, प्रचार प्रसार संयोजक कैलाश सोनी उपस्थित थे।
प्रेस वार्ता से पूर्व अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की प्रांत कार्यकारिणी बैठक हुई। कल्याण आश्रम की केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक 30 सितंबर से प्रारंभ हुई। इसके बाद देश भर के प्रांत पदाधिकारियों की एक व्यापक बैठक दो और तीन अक्टूबर को भीलवाड़ा के रामेश्वर भवन में संपन्न हो रही है। इसमें 350 से अधिक पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
वनवासी कल्याण परिषद के जिला उपाध्यक्ष कैलाश सोनी ने बताया कि आज अखिल भारतीय वनवासी कार्यकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि जगतगुरु निंबारकाचार्य पीठाधीश्वर श्री जी महाराज ने प्रातः 9.15 बजे दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रभु श्री राम ने 14 वर्ष का वनवास में वनवासियों का कल्याण किया, उसी प्रकार वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा वनवासियों को मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, जो बहुत ही पुण्य कार्य है।
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट ने वनवासियों के कल्याण के लिए किए जा रहे कल्याणकारी कार्यों के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान राम प्रकाश अग्रवाल, ज्ञानचंद जैन, दुर्गालाल सोनी, नरेश ओझा, महावीर सोनी, अनीता काबरा, गणेश काबरा, कैलाश नंदावत, दिवाकर जावा, गुणमाला अग्रवाल, महेश खंडेलवाल, कन्हैयालाल मूंदड़ा, यश श्रीवास्तव, कमल गोखरू, तरुणा शर्मा, ओम प्रकाश अग्रवाल, भागचंद बाहेती, पदम जैन, दीपक पुरोहित, सर्वेश्वर कल्या सहित कार्यकर्ता बैठक की तैयारियों में जोर-शोर से लगे हुए हैं।
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग के साथ पारित यह प्रस्ताव मानगढ़ के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व, जनजातीय समाज के बलिदान और उसके संरक्षण तथा पाठ्य-पुस्तकों में इतिहास को उचित स्थान देने की मांग को केंद्र में रखता है।