संजय कॉलोनी में गूंजे श्रीकृष्ण के जयकारे: श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण लीलाओं व गोवर्धन महिमा का भव्य वर्णन

भीलवाड़ा की संजय कॉलोनी स्थित श्री चारभुजा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन महिमा ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य शक्ति देव जी के मुखारविंद से निकले शब्दों ने भक्ति का कैसा माहौल बनाया?

Update: 2026-06-17 14:05 GMT

भीलवाड़ा की संजय कॉलोनी स्थित श्री चारभुजा मंदिर में 26वें पाटोत्सव के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु और कथावाचक आचार्य शक्ति देव जी महाराज।

संजय कॉलोनी स्थित श्री चारभुजा मंदिर में आयोजित 26वें पाटोत्सव महोत्सव के पावन अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिवस भक्ति और आनंद के अनूठे संगम का साक्षी बना। कथा व्यास आचार्य शक्ति देव जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी, गोवर्धन धारण और छप्पन भोग के प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण और संगीतमय वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कथा के माध्यम से आचार्य ने यह संदेश दिया कि श्रीकृष्ण की लीलाएं मात्र घटनाएं नहीं, बल्कि लोककल्याण, धर्म की स्थापना और भक्त के संरक्षण का दिव्य मार्ग हैं।

कथा के दौरान आचार्य शक्ति देव जी महाराज ने बाल लीलाओं का चित्रण करते हुए पूतना वध, शकटासुर एवं तृणावर्त वध के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि बाल रूप में भी प्रभु अधर्म के विनाश के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने माता यशोदा के वात्सल्य और संतान के प्रति संस्कारों के महत्व पर विशेष बल दिया। आचार्य ने कालिया नाग दमन के प्रसंग द्वारा समाज को अहंकार और अत्याचार के अंत का संदेश दिया। वहीं, गोवर्धन पूजा और गिरिराज धारण प्रसंग में प्रकृति संरक्षण, सामूहिक एकता और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास की महिमा का बखान किया गया। छप्पन भोग की झांकी और भजनों की सुमधुर प्रस्तुतियों ने संपूर्ण पंडाल को नंदलाल के जयघोषों से गुंजायमान कर दिया।



 




आयोजन के अंत में महाआरती की गई और छप्पन भोग का प्रसाद वितरित किया गया। श्री चारभुजा मंदिर सेवा समिति एवं महिला मंडल द्वारा आयोजित इस भव्य अनुष्ठान में धर्मानुरागी परिवारों, विशेषकर श्रीमती अयोध्या देवी रूनवाल और उनके परिजनों व साहिल सुराना परिवार का सम्मान किया गया। समिति के मंत्री अरविंद जैन ने बताया कि सम्मान समारोह में अतिथियों को मेवाड़ी परंपरा के अनुरूप पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। मंदिर पाटोत्सव और भागवत कथा की सफलता सुनिश्चित करने के लिए समिति के अध्यक्ष जगदीश चंद्र देवपुरा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं की एक विस्तृत श्रृंखला निरंतर सक्रिय है, जो इस आयोजन को भव्यता प्रदान करने में जुटे हुए हैं। यह आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है।

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