भीलवाड़ा में पर्युषण के तीसरे दिन आचार्य पुलकसागर ने दिया उत्तम आर्जव धर्म का संदेश
शास्त्रीनगर के सूर्यमहल में पाप नाशनम् शिविर के दौरान श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, आचार्य ने जीवन में सहजता और सरलता अपनाने पर दिया जोर।
तस्वीर में मंदिर के भीतर जैन श्रद्धालु कलश से भगवान की प्रतिमाओं पर अभिषेक करते नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा, 18 सितम्बर। पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में श्रद्धा और भक्ति का ऐसा वातावरण रहा, जहां सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं भगवान की पूजा-अर्चना और भक्ति में लीन रहे। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना के तहत उत्तम आर्जव धर्म का पूजन एवं आराधना की गई।
पर्युषण के दौरान आयोजित पाप नाशनम् शिविर में शामिल सैकड़ों श्रद्धालु प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक परमात्मा की पूजा-अर्चना और भक्ति में समर्पित रहे। तीसरे दिन आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में भगवान का अभिषेक करने चक्रवर्ती के साथ इन्द्र रूप में श्रावक उमड़े। भगवान की भक्ति में श्रावक-श्राविकाएं झूम उठे और जमकर नाचते-गाते रहे।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म का संदेश देते हुए कहा कि आर्जव धर्म जीवन में सहजता एवं सरलता की सीख देता है। जो सरल स्वभावी होता है और सहजता व सादगी से जीवन जीता है, वह परमात्मा को प्राप्त करता है। भावुक व्यक्ति को छलना आसान होता है, लेकिन यह धर्म छल-कपट से बचने तथा विनम्र और सरल रहने की सीख देता है। जिनेन्द्र भगवान की भक्ति में मन लगाएंगे तो इस भव के साथ परभव भी सुधर जाएगा।
आचार्यश्री ने कहा कि छल-कपट से कभी कार्य की सिद्धि नहीं होती। जीवन में क्रोध और मायाचार से नहीं, पुण्य के प्रताप से ही सफलता मिलती है। पुण्य नहीं होने पर कुछ भी करें, सफलता नहीं मिलेगी। पुण्य का जोर कमजोर पड़ता है तो करोड़पति भी खाक में मिल जाते हैं। पुण्य प्रबल होने पर छल-कपट भी कुछ देर चल जाता है, लेकिन जैसे ही वह कमजोर पड़ता है, उनका नाश हो जाता है। छल-कपट का परिणाम हमेशा नुकसान देने वाला होता है। उन्होंने कहा कि आर्जव धर्म कहता है कि जो काम सहजता और सरलता से होता है, उसका आनंद ही अलग होता है। कभी अहम और अहंकार नहीं करना चाहिए तथा समाज को एक रखने के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए। साथ-साथ चलने पर जिंदगी का आनंद आता है।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिंदगी में हमेशा शुभ में रहो। मन, वचन और काया तीनों को सरल करो और हमेशा शुभ उच्चारण करो। जो शुभ भाव है, उसे तुरंत पूर्ण करो और जो अशुभ भाव है, उसे कल के लिए टाल दो। जिसका जीवन उत्सव होता है, उसकी मृत्यु महोत्सव बन जाती है और जो दुःखी जीते हैं, उनकी मृत्यु मातम बन जाती है। उन्होंने कहा कि हमारे शब्द बाद में पहुंचते हैं, भावनाएं पहले पहुंच जाती हैं। किसी के प्रति मन के भाव गलत हैं तो बिना बोले भी भावनाएं पहुंच जाएंगी। मन को हमेशा पवित्र और पावन रखने की सीख उत्तम आर्जव धर्म देता है।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि चक्रवर्ती बनकर भगवान का अभिषेक करने का सौभाग्य कपूरचंद, लक्ष्मीदेवी विकास जैन ने प्राप्त किया। शांतिधारा का सौभाग्य विनोद, कल्पना फंडोत ने प्राप्त किया।
दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन शनिवार को उत्तम शौच धर्म की आराधना होगी। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा के अनुसार पाप नाशनम शिविर एवं पर्युषण की दस दिवसीय आराधना अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 25 सितम्बर को पूर्ण होगी।
इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5.30 से 6.30 बजे तक योग ध्यान एवं आचार्य भक्ति हो रही है। सुबह 7 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा व दशलक्षण धर्म पूजन हो रहा है। सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन हो रहे हैं। शाम 4 बजे से धार्मिक कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। शाम 5.30 से 6.30 बजे तक प्रतिक्रमण एवं ध्यान साधना का आयोजन होता है। शाम 6.30 बजे आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से परमात्मा की भक्ति हो रही है।