Difference between spark ignition and compression ignition : ऑटोमोबाइल की दुनिया में जब भी किफायती सफर और लंबी दूरी की यात्रा की बात आती है, तो 'डीजल कार' का नाम सबसे ऊपर आता है। एक औसत भारतीय कार खरीदार के मन में यह सवाल हमेशा कौंधता है कि आखिर एक ही क्षमता के इंजन होने के बावजूद डीजल गाड़ियां, पेट्रोल के मुकाबले 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा माइलेज कैसे दे देती हैं? अक्सर लोग इसे केवल ईंधन की कीमत से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हकीकत इसके इंजन की जटिल इंजीनियरिंग और 'थर्मोडायनेमिक्स' के सिद्धांतों में छिपी है। आइए जानते हैं उस 'पावर गेम' के बारे में जो डीजल को माइलेज का निर्विवाद बॉस बनाता है।

ईंधन की ताकत: डीजल की उच्च 'एनर्जी डेंसिटी' :

डीजल के बेहतर माइलेज की पहली और बुनियादी वजह स्वयं 'डीजल फ्यूल' की रासायनिक संरचना है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो पेट्रोल के मुकाबले डीजल में प्रति लीटर ऊर्जा की मात्रा (Energy Density) काफी अधिक होती है।

  • अधिक कैलोरी मान: डीजल में पेट्रोल की तुलना में लगभग 10-15% अधिक ऊर्जा संचित होती है।
  • परिणाम: इसका सीधा अर्थ यह है कि इंजन उसी मात्रा के ईंधन से कहीं अधिक कार्य (Work) कर पाता है, जिससे कम फ्यूल खर्च कर गाड़ी लंबी दूरी तय कर लेती है।


कंप्रेशन रेशियो: दबाव से पैदा होती है बेमिसाल शक्ति

  • इंजन की कार्यक्षमता उसके 'कंप्रेशन रेशियो' पर निर्भर करती है। डीजल इंजन को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह हवा को पेट्रोल इंजन की तुलना में कहीं ज्यादा दबाव के साथ दबा सके।
  • पेट्रोल बनाम डीजल: जहाँ एक सामान्य पेट्रोल इंजन 8:1 से 12:1 के कंप्रेशन पर काम करता है, वहीं डीजल इंजन इसे 20:1 या उससे भी अधिक तक ले जाता है।
  • फायदा: उच्च दबाव के कारण ईंधन की हर एक बूंद पूरी तरह से जलती है (Complete Combustion)। जब ईंधन की बर्बादी न्यूनतम होती है, तो इंजन की थर्मल एफिशिएंसी बढ़ जाती है और माइलेज अपने आप रॉकेट की तरह ऊपर चला जाता है।


कंप्रेशन इग्निशन: बिना स्पार्क प्लग का 'जादू'

डीजल और पेट्रोल इंजन के बीच सबसे बड़ा तकनीकी अंतर 'इग्निशन' यानी ईंधन जलाने की प्रक्रिया का है।

  • पेट्रोल इंजन: इसमें ईंधन जलाने के लिए 'स्पार्क प्लग' की आवश्यकता होती है, जो कृत्रिम चिंगारी पैदा करता है।
  • डीजल इंजन (कंप्रेशन इग्निशन): यहाँ किसी स्पार्क प्लग की जरूरत नहीं होती। इंजन सिलेंडर के भीतर हवा को इतना ज्यादा दबाता है कि उसका तापमान स्वयं ही डीजल को जलाने के लिए पर्याप्त हो जाता है।
  • नियंत्रित दहन: इस प्रक्रिया से ईंधन का दहन अधिक नियंत्रित और प्रभावी होता है, जिससे टॉर्क (Torque) बढ़ता है और गाड़ी भारी वजन के साथ भी कम ईंधन की खपत करती है।
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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