अब 36 लाख से अधिक नौकरियां होंगी उपलब्ध ; जानें क्या है प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) ने 36.33 लाख रोजगार सृजित कर रचा इतिहास। जानें कैसे सूक्ष्म उद्यमों और सब्सिडी से आत्मनिर्भर बन रहा है ग्रामीण भारत।

सिलाई मशीन पर काम करती एक महिला उद्यमी प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के लाभ के संदर्भ में।
Prime Minister Employment Generation Programme news : भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की दूरदर्शी पहल, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), वर्तमान में देश के आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाला एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। यह कार्यक्रम न केवल जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि लाखों परिवारों के लिए स्थायी आजीविका का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा कार्यान्वित इस योजना ने अब तक लगभग 36.33 लाख लोगों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा कर देश की ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूंक दी है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन पहली पीढ़ी के उद्यमियों के सपनों को पंख देने वाला एक वित्तीय संबल है, जो विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।
PMEGP योजना की कार्यप्रणाली सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों को बैंक ऋण पर 'मार्जिन मनी' (सब्सिडी) प्रदान करने पर आधारित है। 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल (2021-22 से 2025-26) के दौरान इस योजना ने अभूतपूर्व सफलता दर्ज की है। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में योजना के लिए आवंटित 13,554.42 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान का शत-प्रतिशत उपयोग किया गया। लक्ष्य से कहीं आगे निकलते हुए, इस योजना ने 4,03,706 सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना सुनिश्चित की, जबकि इसका प्रारंभिक लक्ष्य 4,02,000 उद्यमों का था। यह उपलब्धि न केवल प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है, बल्कि देश के युवाओं में उद्यमिता के प्रति बढ़ती ललक को भी स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता इसकी समावेशी प्रकृति और ग्रामीण पहुंच में निहित है। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में इस योजना ने मील का पत्थर स्थापित किया है, जहां कुल लाभार्थियों में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। वितरित की गई कुल सब्सिडी का 45 प्रतिशत हिस्सा महिला उद्यमियों के खातों में पहुंचा है, जो समाज में महिला नेतृत्व वाले व्यवसायों के बढ़ते प्रभाव की पुष्टि करता है। इसके साथ ही, सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से भी यह योजना अत्यंत प्रभावी रही है, जिसमें 54 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित हैं। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इस योजना के तहत स्थापित होने वाले लगभग 80 प्रतिशत उद्यम ग्रामीण भारत की गोद में फल-फूल रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन कम हो रहा है और ग्रामीण औद्योगीकरण को गति मिल रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
