Indian MSME sector growth report 2026 : वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी उथल-पुथल और अनिश्चितताओं के भंवर के बीच भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा सोमवार को जारी की गई एक विस्तृत रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि तमाम अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बावजूद भारत के छोटे उद्योग न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि वे विस्तार की ओर भी अग्रसर हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि यदि इस विकास की रफ्तार को वैश्विक मंदी के साये से बचाना है, तो सरकार की ओर से समय पर सटीक नीतिगत समर्थन और एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय माहौल की तत्काल आवश्यकता होगी।

पीएचडीसीसीआई ने अपने 'एसएमई मार्केट सेंटिमेंट इंडेक्स' (SMESI) का चौथा संस्करण पेश किया है, जो जनवरी से मार्च 2026 की अवधि के प्रदर्शन का आईना है। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, मार्च तिमाही में 'एसएमई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स' 56.5 के स्तर पर रहा। यद्यपि यह पिछली तिमाही के 58.9 अंक से थोड़ा कम है, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि 50 से ऊपर का कोई भी अंक सेक्टर के विस्तार और सकारात्मकता का ठोस प्रमाण है। इसी तरह, अप्रैल से जून 2026 की आगामी तिमाही के लिए 'बिजनेस आउटलुक इंडेक्स' 58.7 दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि भविष्य के प्रति उद्यमियों का भरोसा अभी भी अटूट बना हुआ है।

रिपोर्ट के गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इस निरंतर वृद्धि के पीछे नए ऑर्डरों की प्राप्ति और उत्पादन में स्थिरता सबसे बड़े कारक रहे हैं। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 37 फीसदी कंपनियों ने स्वीकार किया है कि उनके पास नए ऑर्डरों की संख्या बढ़ी है, जिसके कारण उन्हें अपना उत्पादन स्तर ऊंचा रखना पड़ा। निवेश के मोर्चे पर भी भारतीय उद्योगपतियों का रुख बेहद उत्साहजनक है। करीब 47 फीसदी कंपनियों ने भविष्य की मांग को देखते हुए अपने पूंजी निवेश (कैपेक्स) को बढ़ाने की योजना तैयार कर ली है। हालांकि, रोजगार के मोर्चे पर कंपनियां वर्तमान में 'रुको और देखो' की संतुलित रणनीति अपना रही हैं, जहां नई भर्तियां धीमी लेकिन निरंतर गति से की जा रही हैं।

अंततः, पीएचडीसीसीआई की यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था की इस 'रीढ़' की जीवंतता को प्रदर्शित करती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बदलते वैश्विक हालात और सप्लाई चेन की बाधाएं किसी भी समय चुनौती खड़ी कर सकती हैं, इसलिए सरकार को एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण उपलब्धता और कच्चा माल सुरक्षा जैसी बुनियादी नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। यह स्पष्ट है कि भारतीय एमएसएमई सेक्टर ने खुद को वैश्विक झटकों के विरुद्ध एक मजबूत ढाल के रूप में स्थापित कर लिया है, लेकिन इसकी पूर्ण क्षमता का दोहन करने के लिए नीतिगत प्रोत्साहन ही अंतिम कुंजी साबित होगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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