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जहांगीर गैलरी में समकालीन कला प्रदर्शनी का उद्घाटन
By EditorialPublished on
यह प्रदर्शनी न केवल इन दोनों कलाकारों की नवीनतम रचनात्मक यात्राओं का दस्तावेज़ है, बल्कि समकालीन कला में आत्मा की संवेदनशीलता, रहस्य और वैचारिकता की एक गूढ़ झलक भी प्रस्तुत करती है। इस समारोह का उद्घाटन 20 मई को शाम 5 बजे हुआ, जिसमें कला, साहित्य, संगीत और वास्तुकला के क्षेत्र के कई दिग्गज हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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मुंबई के काला घोड़ा स्थित प्रतिष्ठित जहांगीर आर्ट गैलरी में सोमवार शाम एक अनूठी कला प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ हुआ। 'Cradle of Mystery and Echoes of the Soul' नामक इस द्वैतीय एकल (Twin Solo) चित्रप्रदर्शनी का आयोजन दो प्रसिद्ध समकालीन कलाकारों — स्वीटी जोशी और संजय सावंत — द्वारा किया गया है।
यह प्रदर्शनी न केवल इन दोनों कलाकारों की नवीनतम रचनात्मक यात्राओं का दस्तावेज़ है, बल्कि समकालीन कला में आत्मा की संवेदनशीलता, रहस्य और वैचारिकता की एक गूढ़ झलक भी प्रस्तुत करती है। इस समारोह का उद्घाटन 20 मई को शाम 5 बजे हुआ, जिसमें कला, साहित्य, संगीत और वास्तुकला के क्षेत्र के कई दिग्गज हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उद्घाटन समारोह के मुख्य आकर्षण वरिष्ठ कवि, कथाकार एवं कला समीक्षक श्री प्रयागजी शुक्ला थे, जिनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को एक विशिष्ट साहित्यिक आयाम दिया। साथ ही प्रसिद्ध चित्रकार, कवि और कला लेखक प्रो. प्रभाकर कोळे; वरिष्ठ चित्रकार श्री विनोद शर्मा; अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वास्तुविद एवं कला समीक्षक प्रो. नरेंद्र डेंगळे; तथा संगीतकार, लेखिका और कलाकार सौ. विद्या डेंगळे जैसे प्रतिष्ठित अतिथियों ने इस अवसर को और भी स्मरणीय बना दिया।
स्वीटी जोशी और संजय सावंत दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से विशिष्ट पहचान रखते हैं, परंतु इस बार उन्होंने एक साझा मंच पर अपने विचारों और अनुभूतियों को रंगों और रूपों के माध्यम से प्रस्तुत किया है।
स्वीटी जोशी की कलाकृतियाँ जहाँ आंतरिक भावनाओं और स्त्री चेतना की अभिव्यक्ति हैं, वहीं संजय सावंत की पेंटिंग्स में शहरी जीवन के जटिल परिदृश्य, अस्तित्व की खोज और आत्ममंथन के तत्व दिखाई देते हैं। दोनों की शैली भिन्न होते हुए भी एक-दूसरे की अभिव्यक्तियों को पूर्ण करती प्रतीत होती हैं।
प्रदर्शनी का नाम 'Cradle of Mystery and Echoes of the Soul' ही इस बात की ओर संकेत करता है कि यह कला सिर्फ दृश्य अनुभव नहीं है, बल्कि आत्मा की गहराइयों में झांकने का एक माध्यम है। कलाकृतियों की रचना में रंग, बनावट और प्रतीकों का अत्यंत सूक्ष्म और प्रभावशाली प्रयोग किया गया है।
जहांगीर आर्ट गैलरी के दर्शक इन कलाकृतियों के माध्यम से न केवल सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं, बल्कि समकालीन समाज, मानव मन और जीवन की रहस्यमयी गहराइयों की यात्रा भी कर सकते हैं।
यह चित्रप्रदर्शनी 21 मई से 26 मई 2025 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक कला प्रेमियों और आम जनमानस के लिए खुली रहेगी। आयोजन स्थल है: जहांगीर आर्ट गैलरी, कक्ष क्र. 2, काला घोड़ा, मुंबई – 400001।
इस कला आयोजन को देखने के लिए देशभर से कला समीक्षक, विद्यार्थी, शोधकर्ता और आम दर्शक बड़ी संख्या में जुट रहे हैं। यह प्रदर्शनी निश्चित रूप से समकालीन कला के क्षितिज पर एक नया अध्याय जोड़ने वाली है।

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