प्रात:काल संवाददाता
सांचौर। सदियों बाद भी शादियों में साफा बांधने की परम्परा बरकरार है। आज भी शादियों में साफा बांधकर बारात में जाने की परम्परा कायम है। यही वजह है कि साफा एक्सपर्ट के पास अग्रिम बुकिंग रहती है। शहर में दूल्हे राजा व बाराती चुनडिया साफा बांध शादी की रौनक में चार चांद लगा रहे हैं। वर्तमान में शादियों व प्रतिष्ठाओं की सीजन में आस-पास के प्रमुख शहरों व कस्बों में साफा बांधने की अग्रिम बुकिंग चल रही है। वर्तमान में लोग शादी में जोधपुरी, जयपुरी बांधणी, लेहरिया, मणीपुरी, मारवाड़ी गोल साफा, मेवाड़ी साफा बांधकर भाग ले रहे हैं।
शहर में निकलने वाले वरघोड़ा में एक ही कलर के जोधपुरी साफा बांधे हुए होने से आकर्षक का केन्द्र बनते हैं। वर्तमान की युवा पीढ़ी भी साफा बांधने को तरजीह देती है। प्राचीन समय में प्रत्येक घर में साफा बुजुर्ग को बांधना आता था, लेकिन आज की पीढ़ी साफा बांधने की कला को नही जानती है। शादियों में साफा बांधने के लिए पारंगत व्यक्ति को ढूंढना पड़ रहा है। सांचौर निवासी प्रदीप शर्मा उर्फ बंटी शर्मा ने साफा बांधने की कला 12 वर्ष की उम्र में ही अपने पापा से सिखी थी।
वर्तमान में वह एक घंटे में जोधपुरी, जयपुरी बांधणी, लेहरिया, मणीपुरी, मारवाड़ी गोल साफा, मेवाड़ी साफा सहित अन्य प्रकार के 90 से 100 साफा बांध लेता है। साफा बांधने के लिए अग्रिम बुंकिग चल रही है। एक साफा बंाधने के भाव 20 से 100 रूपए तक लिए जा रहे हैं।
वहीं दूल्हे के लिए साफा बांधने के भाव पांच सौ से इक्कीस सौ रूपए चल रहे हैं। शादी से पहले रूम में आवश्यकता अनुसार साफा बांधकर रखे जा रहे हैं। शर्मा ने बताया कि उन्होंने साफा बांधने की कई प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है। साफा बंाधने के लिए ऑर्डर मुम्बई, अहमदाबाद, चैन्नई, बंगलूरू, गोवा सहित कई महानगरों में आते हैं।
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