छोटीसादड़ी। 15 अक्टूबर से पहले बोवनी कर चुके किसानों के खेतों में लिवाई चिराई का काम शुरू हो गया है। इस वर्ष 12 फरवरी से ही चीरा लगाने की स्थिति बन गई थी। हालांकि पाला प्रभावित क्षेत्रों में किसान चीरा लगाने की स्थिति में नहीं दिखाई दे रहे है। ऐसे में किसान आधे खेत में चीरा व आधे खेत में हकाई कराने की योजना बना रहे है। कई किसान तो अब मौसम की ओर देख कर चीरा लगाने की सोच रहे है। फिर भी उन्हें अंदेशा है कि कही एक बार और पाला गिरा तो अफीम की फसल पूरी नष्ट हो सकती है। इसलिए कई किसान अभी दो-चार दिन का और इंतजार करते दिखाई दे रहे है।
महंगी है मजदूरी : डोडा चिराई का कार्य अनुभवी लोगों से ही कराया जाता है। इसलिए मजदूरी भी अधिक होती है। इस बार डोडा चिराई के लिए मजदूर तीन सौ रूपए तक मांग रहे है। इससे अधिकांश किसान परिजनों के साथ खुद चिराई के कार्य में जुटे हुए है। धामनिया के किसान रामप्रसाद शर्मा ने बताया कि चिराई के लिए सात-आठ लोगों की जरूरत होती है। छोटा परिवार होने के कारण मजदूर लेना महंगा पड़ता है।
इस बार अधिक दिनों तक चलेगी चिराई : किसानों के अनुसार डोडा की चिराई व लुवाई का काम वैसे तो 25 दिन का होता है। लेकिन इस साल यह कार्य अधिक दिनों तक चलेगा। इसका कारण पाला गिरना है। किसानों ने पाला प्रभावित क्षेत्रों में खाद देकर सिंचाई की है।
इससे नया फुटान आने लगा है। इसके चलते नई फुटान वाली फसलों में देरी से चीरा लगेगा।
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