बीजिंग। भारत में सेक्स शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर भले ही विवाद हो, लेकिन पड़ोसी देश चीन ने एक कदम आगे बढ़कर कॉलेजों में इस साल से सेक्स शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। आश्चर्य की बात यह है कि चीनी छात्रों में इसको लेकर खासा उत्साह नहीं दिख रहा है। एक मनोवैज्ञानिक पाठ्यक्रम के तहत प्रेम और सेक्स शिक्षा को अनिवार्य किया गया है, जो कि इसी महीने से लागू हो गया है।
सरकारी अखबार 'चाइना डेलीÓ ने शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया, मंत्रालय ने इस साल जून में विश्वविद्यालयों को सभी संकायों के छात्रों के लिए एक अनिवार्य मानसिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम तैयार करने को कहा था। वैसे इससे पहले भी कॉलेजों में यह पाठ्यक्रम एक वैकल्पिक विषय के रूप में उपलब्ध था, लेकिन अब इसे अनिवार्य कर दिया गया है। नए अनिवार्य पाठ्यक्रम के सात भाग होंगे। प्रेम और सेक्स के अलावा इस पाठ्यक्रम में अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं से निपटने को लेकर भी अध्ययन सूची है। इसमें पढ़ाई कादबाव भी शामिल है। सरकार के इस कदम को छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। पेकिंग यूनिवर्सिटी में चिकित्सा विज्ञान की 18 वर्षीय छात्रा गावो चांग ने कहा कि इस तरह के पाठ्यक्रम नए छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। पेकिंग विश्वविद्यालय में व्यापार प्रबंधन की द्वितीय वर्ष की छात्रा वांग केफेई ने कहा, मैंने प्रथम वर्ष में मनोवैज्ञानिक पाठयक्रम लिया था। उसमें सेक्स शिक्षा भी थी। यह बहुत उबाऊ विषय था। मुझे कुछ भी फायदा नहीं हुआ। उसके ब्वॉयफ्रेंड हे फेंग का भी यही मानना है। फेंग ने कहा, सभी छात्रों को इस तरह की शिक्षा की जरूरत नहीं है। वैसे भी हम विश्वविद्यालय के छात्र हैं और हममें से ज्यादातर सेक्स और प्रेम के बारे में जानते हैं।


