उद्योग जगत ने सरकार को दिया सुझाव
नई दिल्ली। उद्योग जगत ने सरकार से आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए निवेश प्रोत्साहन भत्ता फिर शुरू करने तथा व्यक्तिगत आयकर देने वालों को और अधिक छूट देने का सुझाव दिया है।
उद्योग जगत ने कहा है कि सालाना ढाई लाख रूपये तक की आय करमुक्त होनी चाहिए तथा 30 प्रतिशत की उच्चतम दर ८ लाख के बजाय १० लाख रूपये की आय वालों पर लागू होनी चाहिए। उद्योगमंडल फिक्की ने कहा है कि कंपनी कर में कोई छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए, जबकि एक अन्य उद्योग मंडल एसोचैम ने इसमें कमी लाने का आग्रह किया है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के साथ शुक्रवार को यहां हुई बजटपूर्व बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने निवेश में तेजी और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के विषय में अपने सुझाव दिए गए। उद्योग संगठन फिक्की, एसोचैम, सीआईआई, निर्यातकों के संगठन फियो और एसईजेड एवं निर्यातोन्मुखी इकाईयों की निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल थे।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) अध्यक्ष बी. मुत्थूरमन ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि हमारा स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र पर जोर रहा है। इन क्षेत्रों को आधारभूत सुविधाओं का दर्जा दिए जाने का सुझाव दिया है।
सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश में तेजी लाने, कौशल विकास बैंक बनाने और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को जल्द अमल में लाने का आग्रह किया गया। आईटीसी अध्यक्ष वाईसी देवेश्वर और हिन्दुस्तान यूनिलीवर के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ नितीन पंराजपे भी इस बैठक में उपस्थित थे। उद्योगपतियों ने स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ साथ विमानन, दूरसंचार क्षेत्र को भी आधारभूत क्षेत्र का दर्जा दिए जाने की मांग की। एसोचैम के निर्वाचित अध्यक्ष राजकुमार धूत ने ब्याज दरों में कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को रिजर्व बैंक को ब्याज दरों में कम से कम एक प्रतिशत कमी लाने की सलाह देनी चाहिए। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन दिए जाने पर भी जोर दिया।


