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        <title>Delhi news</title>
        <description>Delhi news from the pratahkal.com</description>
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        <title>निष्कासन से दुख पहुंचा : सोमनाथ</title>
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        <description>&lt;br /&gt;नई दिल्ली, २३ जुलाई। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने स्उायं को मार्क्सउाादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से निष्कासित किये जाने पर दुख उयक्त किया है।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;माकपा वऎे पोलित ब्यूरो द्वारा पार्टी से निष्कासित किये जाने वऎे फैसले पर प्रतिक्रिया उयक्त करते हुए चटर्जी ने आज यहां कहा कि उन्हें इससे दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि उाह हमेशा पार्टी वऎे समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं।&lt;br /&gt;चटर्जी ने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी उारिोधी गतििउािध में हिस्सा नहीं लिया और न ही कभी पार्टी वऎे अनुशासन को तोड़ा। पार्टी वऎे पोलित ब्यूरो ने आज अपनी बैठक में चटर्जी को पार्टी से निकालने का फैसला किया है।</description>
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        <title>गठजोड़ है सपा-कांग्रेस का अगला एजेंडा</title>
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        <description>&lt;br /&gt;नई दिल्ली, २३ जुलाई। वामदलों, भाजपा और बसपा की तमाम कोशिशों के बाद भी सरकार को गिरने से बचा लेने के बाद समाजवादी पार्टी व कांग्रेस का अगला एजेंडा चुनावी गठजोड़ है। &lt;br /&gt;बुधवार को सपा मुखिया मुलायम सिंह व महासचिव अमर सिंह ने संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। जबकि जरूरी मसलों पर बात के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भी नए-पुराने सहयोगियों से जल्द ही मशविरा करने की उम्मीद है। &lt;br /&gt;अमर सिंह ने बुधवार को अपने आवास पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा, सांप्रदायिक ताकतों और मौकापरस्तों को हराने के लिए वैसे तो दोनों दलों के बड़े नेताऒं के बीच बात हो चुकी है। जहां तक गठजोड़ का सवाल है, हम चाहते हैं कि दोनों दल उन्हें परास्त करने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में जाएं। संप्रग सरकार और सपा के आगे के रिश्तों के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार के विश्वासमत हासिल कर लेने के बाद मुलायम सिंह और मैंने सोनिया गांधी से मिलकर उन्हें बधाई दी है। कुछ बातें भी हुई हैं। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री भी जल्द ही सहयोगियों के साथ औपचारिक रूप से बात करेंगे। &lt;br /&gt;इससे पहले दिन में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने भी मुलायम सिंह से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच चुनावी गठजोड़ फायदेमंद साबित होगा। </description>
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        <title>मायावती को परख लेना चाहते हैं नए दोस्त </title>
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        <description>&lt;br /&gt;{mosimage}नई दिल्ली, २३ जुलाई। करार पर सरकार गिराने की मजबूरियों के चलते वामदल और यूएनपीए समेत दूसरे कुछ दल भले ही बसपा के नए दोस्त बन गए हों, लेकिन दूर तक साथ के लिए वे मायावती को ठीक से परख लेना चाहते हैं। यही वजह है कि तात्कालिक जरूरतों के लिए एकजुट इन दलों ने अभी न तो चुनाव पूर्व किसी गठजोड़ का और न ही किसी तीसरे राजनीतिक विकल्प को खड़ा करने का फैसला किया है। &lt;br /&gt;सूत्रों के मुताबिक वामदलों ने बसपा, यूएनपीए, अजित सिंह, एचडी देवेगौड़ा और दूसरे कई दलों के साथ मिलकर सरकार गिराने जो रणनीति बनाई थी, उसमें कामयाब न होने से उन्हें बड़ी निराशा हाथ लगी है। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार गिर जाएगी और वे खुद को तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में खड़ा करेंगे। बताते हैं कि मनमाफिक नतीजे न आने की वजह से ही बुधवार को बसपा सुप्रीमो मायावती के दिल्ली स्थित आवास पर हुई बैठक में भविष्य के गठजोड़ और कांग्रेस, भाजपा व सपा को किनारे रखकर नए तीसरे राजनीतिक विकल्प पर कोई फैसला नहीं हो सका। लिहाजा उसमें मायावती की अहम भूमिका की बात भी धरी रह गई। &lt;br /&gt;बैठक में महंगाई, किसानों की आत्महत्याएं, परमाणु करार, सांप्रदायिक ताकतों और सीबीआई जैसी संस्थाऒं का राजनीतिक जरूरतों के लिए दुरूपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर साझा अभियान चलाने का फैसला लिया गया। बताते हैं कि मुलायम का साथ छूटने के बाद वामदल मायावती का साथ तो चाहते हैं, लेकिन वे हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। पार्टी ने मनमोहन सरकार बचने के बाद मायावती के उस बयान पर भी गौर किया है, जिसमें उन्होंने `दलित की बेटी&amp;#39; को प्रधानमंत्री बनने से रोकने की बात कई बार कही है। हालांकि चंद्रबाबू नायडू जैसे नेता को दलित वोट का लालच है और उनकी मंशा आंध्रप्रदेश में मायावती के जरिये राजनीतिक लाभ लेने की है। इसी तरह इनेलो जैसे दल की भी अपनी जमीन है और वे उसमें कोई दखल से घबरा रहे हैं। भविष्य के खतरों को देखते हुए ही अब ये दल जल्दबाजी में कोई फैसला करने के बजाय बसपा को और ठीक से परख लेना चाहते हैं। बैठक के बाद अजित सिंह और देवेगौड़ा ने पत्रकारों से कहा कि उन सबका उद्देश्य संप्रग-राजग व कांग्रेस-भाजपा का विकल्प बनना है और यही दल उसे कर सकते हैं। &lt;br /&gt;करात ने साफ कहा कि हम यहां पांच अहम मुद्दों को जनता के सामने उठाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। यह पूछने पर कि इसका नेता कौन है? मायावती ने कहा, सभी बराबर के नेता हैं। </description>
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        <title>दिन भर जश्न का माहौल</title>
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        <description>&lt;br /&gt;{mosimage}नई दिल्ली, २३ जुलाई । भाजपा वाम दलों और तीसरे मोर्चे के जी तोड़ प्रयासों के बावजूद कल रात विश्वास मत जीतने वाली संप्रग सरकार के मुख्य घटक कांग्रेस के मुख्यालय और पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी के आवास पर आज दिन भर जश्न का माहौल रहा। &lt;br /&gt;वैसे जश्न तो कल रात से ही शुरू हो गया था और संसद के भीतर का जश्न बाहर पटाखों की आवाज तथा आसमान में आतिशबाजी के रूप में देखने को मिला। ढोल नगाड़ों के साथ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पार्टी मुख्यालय २४, अकबर रोड और सोनिया के आवास १०, जनपथ पर भारी संख्या में मौजूद थे। ये कार्यकर्ता एक दूसरे को तिलक लगा रहे थे, मिठाइयां बांट रहे थे और सोनिया तथा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समर्थन में नारे लगा रहे थे। &lt;br /&gt;कमोबेश आज भी यही माहौल पूरे दिन देखने को मिला। ``सोनिया गांधी जिन्दाबाद&amp;#39;&amp;#39;, ``राहुल गांधी जिन्दाबाद&amp;#39;&amp;#39; के नारों से न सिर्फ कांग्रेस मुख्यालय बल्कि सोनिया के आवास के बाहर का इलाका गूंज रहा था। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर मुख्य सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारें थी। एक कार्यकर्ता ने कहा, इतनी अधिक गाड़ियां मुख्यालय के बाहर मैंने आज तक नहीं देखीं। यातायात पुलिस और दिल्ली पुलिस के कर्मियों को गाड़ियों को पार्क कराने और भीड़ को नियंत्रित करने में खासी मशक्कत करनी पड़ी लेकिन कोई भी मानने वाला नहीं था क्योंकि मैडम सोनिया के नेतृत्व में ``किंग मनमोहन&amp;#39;&amp;#39; ने विश्वास मत जीतकर पूरी दुनिया को संदेश दे दिया कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत अपनी मजबूत पहचान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। &lt;br /&gt;</description>
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        <title>पार्टी से निष्कासित मि. स्पीकर</title>
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        <description>&lt;br /&gt;{mosimage}नई दिल्ली, २३ जुलाई । माकपा ने चार दशक से अधिक समय से उससे जुड़े रहे सोमनाथ चटर्जी को पार्टी के निर्देशानुसार लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देने के आरोप में आज पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी महासचिव प्रकाश करात की अध्यक्षता में यहां हुई पोलित ब्यूरो की बैठक में यह फैसला किया गया है। बैठक के बाद पार्टी ने एक बयान में कहा, माकपा के पोलित ब्यूरो ने एकमत से सोमनाथ चटर्जी को तत्काल पार्टी की सदस्यता से निष्कासित करने का फैसला किया है।&lt;br /&gt;गौरतलब है कि वामदलों द्वारा संप्रग सरकार से समर्थन वापस लिये जाने के बाद चटर्जी ने पार्टी के निर्देशानुसार विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से पहले लोकसभा अध्यक्ष के पद से इस्तीफा नहीं दिया जबकि पार्टी ने उनका नाम सांसदों की उस सूची में भी दे दिया था जो उसने संप्रग सरकार से समर्थन वापसी के लिये राष्ट्रपति को सौंपी थी। पार्टी ने संविधान की धारा १९ (१३) के तहत पार्टी की नीति का उल्लंघन करने के आरोप में संक्षिप्त कार्रवाई कर बिना किसी नोटिस के चटर्जी को निष्कासित कर दिया। &lt;br /&gt;७९ वर्षीय बैरिस्टर और १० बार सांसद रहे चटर्जी ने पार्टी द्वारा लोकसभा अध्यक्ष पद छोड़ने के प्रत्यक्ष और परोक्ष आग्रह को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि वह जिस पद पर हैं वह दलगत राजनीति से ऊपर है। चटर्जी ने वर्ष २००४ में सर्वसम्मति से लोकसभा अध्यक्ष पद संभाला था। पिछले एक पखवाड़े से सोमनाथ कह रहे थे वह उचित फैसला लेंगे लेकिन बाद में यह साफ हो गया था कि वह पार्टी के आग्रह को नहीं मानेंगे। उन्होंने आज भी कहा कि वह अगले महीने के शुरू में राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए कुआलालम्पुर जा सकते हैं।&lt;br /&gt;माकपा ने उम्मीद जतायी थी कि चटर्जी सोमवार को विश्वास मत से पहले इस्तीफा दे देंगे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और दो दिन चले लोकसभा के विशेष सत्र की अध्यक्षता की। चटर्जी कुछ समय तक सदन में माकपा के संसदीय दल के नेता भी थे। माकपा के वयोवृद्ध नेता ज्योति बसु और अन्य द्वारा समझाने में नाकाम रहने के बाद माना जा रहा है कि पार्टी ने वरिष्ठ नेता विमान बोस को बदले राजनीतिक हालात में उन्हें पद छोड़ने को राजी करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। &lt;br /&gt;माकपा का यह फैसला देश में अपनी तरह का पहला है जब किसी पार्टी ने ऐसे पद पर काबिज व्यक्ित से अपने आप को अलग किया हो। लोकसभा अध्यक्ष बनने वाले पहले चटर्जी सिर्फ १९८४ में संक्षिप्त अवधि के अलावा १९७१ से लगातार निचले सदन के सदस्य रहे। &lt;br /&gt;लोकसभा अध्यक्ष ने हालांकि पार्टी के फैसले पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। वामदलों के नेताऒं ने चटर्जी पर प्रहार किया वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी राजद ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी सराहना की। &lt;br /&gt;इस बीच पूर्व अटर्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा है कि, चटर्जी का निष्कासन दुखद है, लेकिन इससे उनके अध्यक्ष पद पर बने रहने पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वे जब तक स्वयं इस्तीफा नहीं दे देते, वे पद पर बने रहेंगे। </description>
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        <title>`भाजपा सांसद दे सकते हैं सामूहिक इस्तीफा'</title>
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        <description>{mosimage}नई दिल्ली, २३ जुलाई । भाजपा ने आज संकेत दिया कि आगामी लोकसभा चुनाव में भ्रष्टाचार को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने के लिए उसके सभी सांसद सदन की सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं। पार्टी के शीर्ष नेता लालवऎृष्ण आडवाणी ने यहां संवाददाताऒं से बातचीत में कहा कि जिस तरह १९८९ में बोफर्स दलाली मामले में विपक्षी सदस्यों ने लोकसभा से इस्तीफा दे कर भ्रष्टाचार को मुख्य चुनावी मुद्दा बना दिया था उसी तरह ``सांसद रिश्वतखोरी कांड&amp;#39;&amp;#39; जैसे भ्रष्टाचार को आगामी चुनाव में मुख्य मुद्दा बनाने के लिए भाजपा के सांसदों के सामूहिक इस्तीफे पर पार्टी विचार कर सकती है।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा, संप्रग ऐसी सरकार है जिसका कार्यकाल दागी लोगों को सम्मलित करके शुरू किया गया और अंत आते आते सरकार बचाई गई दागी जीत के सहारे। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि अगर सारा विपक्ष सामूहिक इस्तीफा दे तो उसका प्रभाव अधिक पड़ेगा लेकिन भाजपा अकेले भी ऐसा करे तो भी उसका असर तो पड़ेगा ही।&lt;br /&gt;आडवाणी ने इस संदर्भ में बोफर्स मामले का जिक्र किया। उन्होंने उत्साहित होते हुए कहा कि आज से दो दशक से थोड़ा ही अधिक पहले सरकार के उच्च स्तर पर बोफर्स दलाली जैसे भ्रष्टाचार के मामले का मीडिया ने भंडाफोड़ किया था। उन्होंने कहा कि स्वीडन से बोफर्स तोपों की खरीद में दलाली खाने से जनता में इतना अधिक रोष उत्पन्न हुआ कि १९८४ के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी को ८० प्रतिशत सीट दिलाने वाली उसी जनता ने १९८९ के चुनाव में उन्हें सत्ता से बाहर ही कर दिया। &lt;br /&gt;विपक्ष के नेता ने कहा कि देश ने २२ जुलाई को उससे भी स्तब्धकारी रिश्वतखोरी घोटाला देखा जब कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने सांसदों को कथित रिश्वत देकर विश्वास मत में ``नाजायज जीत&amp;#39;&amp;#39; दर्ज की। उन्होंने कहा कि ``धन के बदले वोट&amp;#39;&amp;#39; घोटाले का भंडाफोड़ होने के बाद भाजपा ने निर्णय किया है कि वह संप्रग सरकार के नाजायज तरीके से सत्ता में बने रहने की कलई खोलने के लिए राष्ट्रीयव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। यह आंदोलन कल से ही शुरू हो जाएगा और २७ जुलाई को प्रत्येक राज्य की राजधानियों में विशाल रैलियां आयोजित होंगी।&lt;br /&gt;</description>
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        <title>सोना-चांदी लुढ़का</title>
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        <description>&lt;br /&gt;नई दिल्ली, २३ जुलाई । कच्चे तेल के पिघलने और शेयर बाजारों की सरपट दौड़ के बीच आज कीमती धातुऒं ने जोरदार डुबकी लगाई। स्थानीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में ५१० रूपए तथा चांदी के दामों में ८८० रूपए का भारी मंदा आया ।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;वदिेशी शेयर बाजारों में भी सोने की हालत पतली रही । सिंगापुर से मिले समाचार में वहां सोने के भाव दो सप्ताह के न्यूनतम स्तर ९३९.२० डालर तक घटने के बाद हाजिर कामकाज में ९४०.७५-९४८.०० डालर प्रति ट्राय आैंस पर न्यूयार्क में कल के ९४८.३०-९४९.९० डालर की तुलना में आठ से दस डालर प्रति ट्राय आैंस नीचे थे । डालर की मजबूती ने भी सोने को नीचे लाने में योगदान दिया ।&lt;br /&gt;चांदी भी सोने की राह पर रही । इसके भाव २५ सेंट गिरकर १७.७५-१७.८१ डालर प्रति ट्राय आैंस रह गए ।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;देश के वायदा बाजारों में अपराह्न के कारोबार में सोना १३००० हजार रूपए से नीचे दिखा । मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में अगस्त के लिए वायदा का भाव ८२ रूपए गिरकर १२९९२ रूपए प्रति दस ग्राम रह गया । अक्टूबर के सौदे में यह १३०८७ रूपए पर ८५ रूपए नीचे था।&lt;br /&gt;स्थानीय बाजार में सोना स्टैंडर्ड ५१० रूपए के नुकसान से १३०४० रूपए प्रति दस ग्राम रह गया । चांदी टंच (९९९) हाजिर में २४९२० रूपए पर ८८० रूपए प्रति किलो का मंदा आया ।</description>
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        <title>१० दलों की नई रणनीति</title>
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        <description>&lt;br /&gt;{mosimage}नई दिल्ली, २३ जुलाई । लोकसभा में मिली पराजय से विचलित हुए बिना नया राजनीतिक समीकरण बनाने का संकेत देते हुए बसपा और वाम सहित दस राजनीतिक दलों के नेताऒं ने कांग्रेस और भाजपा का विकल्प पेश करने की आज घोषणा की। इसके साथ ही भारत-अमेरिका परमाणु करार, मंहगाई और वऎृषि संकट जैसे मुद्दों पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने का भी ऐलान किया गया। &lt;br /&gt;इन दसों&amp;nbsp; नेताऒं की उपस्थिति में बसपा सुप्रीमो मायावती ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, संप्रग सरकार लोकसभा में कल वोट भले ही जीत गई हो लेकिन जिस अनैतिक हथवऎंडों से जीत हासिल की गई है उससे वह देश का विश्वास खो चुकी है।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि जिस तरीके से संप्रग ने जीत के लिए वोट बटोरे हैं वह लोकतंत्र की ``पराजय और हत्या&amp;#39;&amp;#39; है। माकपा महासचिव, प्रकाश करात ने भी राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार विश्वास प्रस्ताव जीत गई है लेकिन राष्ट्र का विश्वास खो दिया है।&lt;br /&gt;मायावती और करात के अलावा बैठक में तेदेपा, भाकपा, फारवर्ड ब्लाक, आरएसपी, जद (एस), रालोद, आईएनएलडी, टीआरएस और झारखंड विकास मोर्चा के नेता उपस्थित थे। यह पूछे जाने पर कि क्या नए मोर्चे का जन्म हो गया है करात ने कहा कि ऐसा नहीं है क्योंकि ये दल संयुक्त अभियान शुरू करने के लिए एकत्र हुए हैं और भविष्य में कई अन्य मुद्दों पर मिल कर कार्रवाई करंेंगे। इनमें साम्प्रदायिक शक्ितयों और राजननीतिक उद्देश्यों के लिए सीबीआई के दुरूपयोग के खिलाफ अभियान भी शामिल हैं।&lt;br /&gt;तेदेपा के एन चन्द्रबाबू नायडू ने कथित ``लोकतंत्र की हत्या&amp;#39;&amp;#39; की भर्त्सना करते हुए कहा कि यह ``राष्ट्रीय शर्म&amp;#39;&amp;#39; की बात है कि सत्ता में चिपके रहने के लिए सरकार सांसदों की खरीद फरोख्त, उन्हें ब्लैकमेल करने, जोड़-तोड़ करने और डराने धमकाने जैसे हथवऎंडो पर उतर आई। उन्होंने दावा किया कि अगर वऎ्रास वोटिंग को देखा जाए तो विपक्ष के पास पूर्ण बहुमत था। नायडू ने कहा कि दस दलों का एक साथ आना इस बात का सुबूत है कि हम कांग्रेस संप्रग और राजग का वास्तविक विकल्प हैं। आने वाले दिनों में हम नंबर एक होंगे।&lt;br /&gt;रालोद के अजित सिंह ने भी कहा कि ये बैठक संप्रग और राजग का विकल्प बन कर देश में वास्तविक शक्ित बन कर उभरेगी। जद एस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने कहा कि उनका दल संयुक्त अभियान में पूर्ण सहयोग करेगा। &lt;br /&gt;मायावती इस सवाल का सीधा जवाब देने से बचती नजर आइंर् कि इस नए राजनीतिक समूह का नेतृत्व कौन करेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या अन्नाद्रमुक नेता जयललिता को भी नए समूह में आमंत्रित किया जाएगा भाकपा नेता ए बी बर्धन ने कहा कि इस बारे मे कोई चर्चा नहीं हुई है। मायावती के निवास पर हुई नाश्ता बैठक में करात, बर्धन, नायडू और अजित सिंह के अलावा भाकपा के डी राजा, फारवर्ड ब्लाक के टी जे चन्द्रचूड़, आरएसपी के अबनी राय, तेदेपा के के येरन नायडू,&amp;nbsp; आईनएएलडी के अजय चौटाला जेवीएम के बाबूलाल मरांडी और माकपा के सीताराम येचूरी भी शामिल हुए।</description>
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        <title>८ पलटू निष्कासित</title>
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        <description>&lt;strong&gt;मनमोहन की जीत ``दागी&amp;#39;&amp;#39; : भाजपा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली, २३ जुलाई । भारतीय जनता पार्टी ने मनमोहन सरकार को मिले विश्वासमत को ``दागी विजय&amp;#39;&amp;#39; करार देते हुये पार्टी के ८ ऐसे सांसदों को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है, जिन्होंने कल लोकसभा में सरकार के पक्ष में मतदान किया या अनुपस्थित रहे।&lt;br /&gt;भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आज सुबह यहां हुई पार्टी के पदाधिकारियों की बैठक में पार्टी उहिप का उल्लंघन करने वाले आठ सांसदों के निष्कासन का फैसला किया गया और दलबदल कानून के तहत इन सांसदों की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने के लिये लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर कर दी गई।&lt;br /&gt;बैठक के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता लालवऎृष्ण आडवाणी और सिंह ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की । जिन सांसदों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है उो है :&amp;nbsp; उत्तर प्रदेश के बृजभूषण शरण सिंह, गुजरात के सोमाभाई पटेल और बाबूभाई कटारा, कर्नाटक के मंजूनाथ कुन्नुर.एच टी सांगलानिया और श्रीमती मनोरमा मध्वाराज, मध्यप्रदेश के चन्द्रभान सिंह और महाराष्ट्र हरिभाऊ राठौड़ ।&lt;br /&gt;भाजपा अध्यक्ष ने जहां इन आठों सांसदों को पार्टी से निष्कासित किये जाने की घोषणा की वहीं आडवाणी ने बताया कि दलबदल कानून के तहत इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने के लिये लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को आज याचिका सौंप दी गयी और उनसे इसपर जल्द से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया गया।&lt;br /&gt;आडवाणी ने मनमोहन सरकार की जीत को ``दागी विजय&amp;#39;&amp;#39; करार दिया और कहा कि जिस तरीके से सांसदों की खुलेआम खरीद फरोख्त की गई वह लोकतंत्र के लिये अत्यंत खतरनाक है। कल के दिन को संसद के इतिहास में ``काला दिवस&amp;#39;&amp;#39; के रूप में जाना जायेगा।&lt;br /&gt;उन्होंने बताया कि पार्टी के तीन सांसदों को रिश्वत के तौर पर जिस तरह से एक करोड़ दिये गये वह अत्यंत शर्मनाक है । उन्होंने कहा कि इस रिश्वत प्रकरण को एक टी वी चैनल ने भी रिकार्ड किया था और वह उसे कल प्रसारित भी करने वाला था लेकिन अब उसने अपना इरादा क्यों बदला यह एक रहस्य है । चैनल ने इस रिकार्डिंग का टेप लोकसभा अध्यक्ष को भी देने की घोषणा की थी लेकिन आज दोपहर तक उसने ऐसा नहीं किया।&lt;br /&gt;यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा इस कांड की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग करेगी आडवाणी ने कहा कि पार्टी चाहती है कि चटर्जी इस मामले की जांच करे जिससे कि सारे तथ्यों का जल्द से जल्द खुलासा हो सके। उन्होंने कहा कि मैं समझता था कि कल की घटना के बाद प्रधानमंत्री स्वयं कहेंगे कि वह इसकी जांच करायेंगे और मामले की तह तक जायेंगे।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि अगर क्रास वोटिंग नहीं हुई होती तो संप्रग सरकार विजयी नहीं हुई होती। उन्होंने कहा, एक सरकार जिसने अपने कार्यकाल का प्रारंभ मंत्रिपरिषद में दागी मंत्रियों को शामिल कर किया था उसके अपने कार्यकाल की समाप्ति भी दागी ही हो रही है । यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा के पास उसके सांसदों को रिश्वत देने के सबूत है आडवाणी ने कहा कि यह स्टिंग आपरेशन भाजपा ने नहीं एक टी वी चैनल ने किया था और उसके पास इसका टेप मौजूद है। उन्होंने कहा कि रिश्वत में दिये गये पैसों को साहसिक सांसदों ने सदन पटल पर रख दिया था जो एक गंभीर घटना है तथा इस मामले की तुलना सामान्य आपराधिक मामले से नहीं की जा सकती।</description>
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        <title>``सोमनाथ लोस अध्यक्ष बने रहें''</title>
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        <description>&lt;br /&gt;नई दिल्ली, २३ जुलाई । कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी माकपा से निष्कासन के बाद भी अपने पद पर बने रहे सकते हैं। &lt;br /&gt;पार्टी प्रवक्ता जयंती नटराजन ने बुधवार को संवाददाताऒं से कहा कि चटर्जी भले ही माकपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे, लेकिन वह सर्वसम्मति के आधार पर लोकसभा अध्यक्ष बने थे। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में चटर्जी के पद पर बने रहने में कोई आपत्ति नहीं हो सकती क्योंकि उन्होंने बहुत ही निडरता से काफी अच्छा काम किया है। &lt;br /&gt;नटराजन ने कहा कि किसी को यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि चटर्जी लोकसभा अध्यक्ष हैं न कि माकपा के। प्रवक्ता ने एक सवाल के जवाब में यह माना कि अगर चटर्जी अब भी अपने पद पर बने रहते हैं तो यह निराली ही बात होगी। &lt;br /&gt;इस बीच राजद नेता और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा है कि सोमनाथ चटर्जी को माकपा से निष्कासित करने का माकपा पोलित ब्यूरो का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल किया कि जब वे लोकसभा के अध्यक्ष पद पर बैठे हैं तो उन्हें कैसे पार्टी से निकाला जा सकता है क्योंकि लोकसभा का अध्यक्ष पार्टी नियमों से बंधा नहीं होता है और वह दलगत भावना से ऊपर होता है। उन्होंने कहा कि इस पद को दल-बदल कानून से छूट मिली हुई है। </description>
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