सूर्योपासना के पर्व डाला छठ पर धार्मिक नगरी वाराणसी मिनी बिहार बन जाती है. और उसकी छठा देखते ही बनती है. वैसे तो यह पर्व बिहार में श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ मनाया जाता है लेकिन बिहार की सीमा से सटा होने के कारण बिहार से यहां आकर बसे लोग वाराणसी में ही धूमधाम से डाला छठ मनाते हैं.
अब तो डाला छठ पर्व ने यहां बड़ा रूप ले लिया है. यहां के वाशिन्दे भी इसे मनाने लगे हैं.वाराणसी में दुर्गापूजा व गणोशोत्सव उसी उत्साह के साथ मनाया जाता है जैसे पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र में.
यहां पर बड़ी संख्या में बिहार के लोग रहते हैं और ऐसे लोगों की संख्या करीब तीन लाख है.आज अस्त होते सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा जबकि कल उगते सूर्य को अर्ध्य के बाद व्रत का पारण होगा.
गंगा में बाढ के समय एकत्र मिट्टी की सफाई अभी तक नहीं होने के कारण पूजा करने वालों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.इस पूजा के लिए सर्वाधिक भीड़ दशामेध घाट पर होती है लेकिन वहां भी सफाई की व्यवस्था नहीं है.
पुलिस अधीक्षक (नगर) मानसिंह चौहान के अनुसार डाला छठ के मद्देनजर पीएसी की बाढ़ राहत की कम्पनी एवं 11 नावें तैनात की गई हैं. सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस को तैनात किया गया है.
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